Health

मुकेश गुप्ता द्वारा संचालित प्रदेश का सबसे बड़ा आंख का एमजीएम हॉस्पिटल की मान्यता स्वास्थ्य विभाग ने इन कारणों से की रद्द…

विवादित निलंबित पुलिस अधिकारी मुकेश गुप्ता की परेसानी कम होती नजर नही आ रही है। सरकार ने गुप्ता के ऊपर एक और बड़ी कार्यवाही करते हुए गुप्ता द्वारा संचालित मिक्की मेमोरियल ट्रस्ट तथा एमजीएम आई हॉस्पिटल, रायपुर की मान्यता रद्द करने स्वास्थ्य विभाग को को लिखा था।

संचालक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने पत्र जारी कर हॉस्पिटल की मान्यता रद्द कर दी है ।

संचालक ने इस संदर्भ में एक पत्र जारी कर समस्त मुख्य चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मिकी मेमोरियल ट्रस्ट तथा एमजीएम आई हॉस्पिटल, रायपुर की मान्यता रद्द करने बाबत सूचित किया है। साथ ही पत्र में कहा गया है कि इस अस्पताल को विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत मिलने वाले अनुदान को बंद करने के निर्देश भी दिये हैं।

क्या है पूरा मामला
निलंबित डीजी मुकेश गुप्ता के करीबी और परिवार वालों द्वारा संचालित एमजीएम अस्पताल के 97 बैंक खातों की लिखित शिकायत स्वर्गीय मिक्की मेहता के भाई माणिक मेहता द्वारा जिला प्रशासन से की गई थी। बताया जाता है कि इस खाते का उपयोग ब्लैकमनी को सफेद करने के लिए किया जाता था। भ्रष्ट अफसर के खिलाफ साक्ष्य मिलने के बाद उसे ट्रस्ट में दान देने के लिए दबाव डलवाया जाता था।

सूूत्रों का कहना है कि EOW को प्राथमिक जांच में इसके दस्तावेज मिले हैं। eow के छापे के बाद अनियमितताओं की जानकारी सरकार को दी गयी थी इसी के आधार पर कार्यवाही हुई है।

ट्रस्ट का 18 साल से नही हुआ ऑडिट
मिक्की मेहता मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना को लगभग 18 साल हो गए हैं। इस दौरान एक बार भी ट्रस्ट द्वारा ऑडिट रिपोर्ट पंजीयक सार्वजनिक न्यास को नहीं देने की जानकारी मिली है। यहां तक ट्रस्ट से कौन लोग जुड़े हैं और वह क्या करते है, उनकी कितनी पूंजी लगी हुई है इसे भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

सीए भी संदेह के दायरे में
ट्रस्ट को मिलने वाले दान की रकम और इसका हिसाब रखने वाले डेढ़ दर्जन चार्टर्ड एकाउंटेंटों की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। बताया जाता है कि नकदी और चेक के जरिए मिलने वाली रकम को वह कैश कराने के साथ ही काले धन को सफेद करते थे। ट्रस्ट द्वारा संचालित खातों में छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और देश के कई राज्यों के कारोबारी और अफसर अपनी रकम जमा कराते थे।

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