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रिपोर्ट में दावा- WhatsApp की बजाय चलाने लगे हैं Telegram और Signal..

अक्टूबर महीने में WhatsApp में Pegasus Spyware की वजह से डेटा लीक होने की खबर के बाद इसके डाउनलोड में 80 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि यूजर्स अब व्हाट्सएप की बजाय Telegram और Signal जैसे एप्स डाउनलोड कर यूज करने लगे हैं। इस बीच एक ताजा रिपोर्ट आई है जिसमें कुछ ऐसा दावा किया गया है जो WhatsApp छोड़कर Telegram और Signal की तरफ दौड़ने वालों को बड़ा झटका दे सकती है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाट्सएप की तरह ही Telegram और Signal भी हैकर्स से बचे हुए नहीं है। लेकिन, दुर्भाग्यवश इनक्रिप्शन तब निशाने पर आ जाता है जब हैकर्स को उस ऐप के सुरक्षा ईकोसिस्टम में कोई खामी या कमी नजर आ जाती है। इसके बाद आपका पूरा डेटा उनकी दया पर निर्भर होता है। व्हाट्सएप में भी एंड टू एंड इनक्रिप्शन के बावजूद, थर्ड पार्टी स्पायवेयर पेगासस ने पीछे के दरवाजे से इसमें एंट्री की और हैकर्स ने अकाउंट्स में सेंध लगा दी। अगर आपको लगता है कि इसके राइवल्स टेलीग्राम और सिग्नल इस सब से सुरक्षित हैं तो ऐसा नहीं है। एक स्टडी में यह दावा किया गया है। यूजर्स के मामले में फेसबुक के मालिकाना हक वाले ऐप व्हाट्सएप के दुनिया में 1.5 बिलियन यूजर्स हैं जिनमें से 400 मिलियन तो भारत में ही हैं। वहीं टेलीग्राम के दुनिया में 200 मिलियन यूजर्स हैं जबकि सिग्नल के सिर्फ 10 मिलियन। यह डेटा गूगल प्ले स्टोर के डाउनलोड्स पर आधारित है। हाल ही में टेलीग्राम और सिग्नल के डाउनलोड में अचानक तेजी आई है क्योंकि व्हाट्सएप में वायरस नजर आया। हालांकि, व्हाट्सएप और iMessage की तरह टेलीग्राम में एंड टू एंड इनक्रिप्शन नहीं दिया गया है। बल्कि इसके लिए आपको सिक्रेट चैट ऑप्शन सिलेक्ट करना होता है। इसके बाद भी इसमें सुरक्षा की गारंटी नहीं होती। Massachusetts Institute of Technology (MIT) ने टेलीग्राम में कमियां होने का दावा किया है। एमआईटी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टेलीग्राम खुद के प्रोप्रायटरी मैसेजिंग प्रोटोकॉल MTProto को यूज करता है जिसमें सिक्योरिटी की कमी पाई गई है। एमआईटी की रिसर्च टीम के सदस्य अकाकी मार्वेलश्विली के अनुसार टेलीग्राम अपने डेटा स्टोरेज के लिए कन्वेंशनल क्लाउट स्टोरेज प्रोसेस को फॉलो करता है। इसका मतलब यह है कि उनके सर्वर सिस्टम पर कंट्रोल करने का डर बना रहता है। हैकर्स इसके सभी मेटा डेटा और अन-इनक्रिप्टेड मैसेजेस का एक्सेस कर सकते हैं। बता दें कि डाउनलोड करने के बाद टेलीग्राम यूजर से कॉन्टेक्ट लिस्ट और स्टोरेज का विकल्प पूछता है। रिसर्चर्स का कहना है कि यही चीज हैकर्स को हमला करने के लिए एक बड़ा सोशल नेटवर्किंग इंफॉर्मेशन देता है जिसे हैक कर किसी भी थर्ड पार्टी को बेचा जा सकता है और वो भी यूजर की मंजूरी बिना रिसर्चर्स ने यह भी दावा किया है कि टेलीग्राम में यूजर भले ही सिक्रेट चैट का विकल्प चुनता है लेकिन फिर भी यह थर्ड पार्टीज को मेटा डेटा देखने का मौका दे देता है। उदाहरण के लिए टेलीग्राम दोनों ही पार्टियों से बातचीत के लिए एग्रीमेंट नहीं लेता और इस वजह से एक अटैकर यूजर से जुड़कर सारे मेटा डेटा को पा सकता है।

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