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राज टाकीज राजधानी की शान – आसिफ खान

रायपुर। बेहतर एवं अतुलनीय सेवाओं की गौरवशाली परम्परा का निर्वहन करते हुए 31 दिसम्बर 2020 को रायपूर के राज छविगृह को स्थापना के 48 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। स्वस्थ मनोरंजन और बेहतर सुविधा के सूत्रवाक्य की वजह से राजधानी रायपुर हो नहीं समूचे छत्तीसगढ़ के सिने दर्शकों पर राज करता आ रहा है।
राज टाकीज के मैनेजर आसिफ खान ने बताया कि राज छविगृह का राज बस इतना ही है कि यह 48 वर्ष पुरानी बिल्डिंग मल्टीप्लेक्स के जमाने में भी मनोरंजन की दुनिया में राज कर रहा है। पारिवारिक माहौल वाले राठी ग्रुप के इस थिएटर ने दर्शकों की सुरक्षा व सुविधाओं की परंपरा को कायम रखा है। कोरोना काल का वह वक्त हमें दुखी कर जाता है जब दर्शकों से राज की दूरी बन गई थी। कोरोना काल में इस टाकीज ने लॉकडाउन की सरकारी परंपरा का पूरी शिद्दत से पालन किया। आखिर हमें दर्शकों के स्वास्थ्य की चिंता जो थी।दर्शकों के लिए राज का द्वार पुन: खुल गया है। मनोरंजन की यात्रा फिर से शुरू हो गई है। कोरोना आज भी तंग कर रहा है। इससे मुकाबला करने राज सामाजिक दूरी को निभाने,मास्क लगाने तथा सेनेटाइजेशन की स्वस्थ परंपरा का छविगृह में पालन कर रहा है। अपने दर्शकों के साथ राज छविगृह एक जनवरी 20121 को 49 वें वर्ष में प्रवेश कर जाएगा। दर्शकों के मनोरंजन की खातिर छविगृह में साल दर साल निखार आते गया है। तभी तो मनोरंजन व प्रदर्शन के नए आधुनिक साधन आने के बावजूद राज का अपने दर्शकों के साथ अटूट जोड़ आज भी कायम है। कितने ही सिंगल स्क्रीन बंद होकर काम्प्लेक्स का आकार लेकर चुके हैं। मल्टीप्लेक्स की बाढ़ सी आ गई है फिर राज थिएटर आज भी दर्शकों के स्नेह की नींव पर मजबूरी से टिका हुआ है। वर्ष के अंक तो हर बारह माह में बदलते रहेंगे नहीं बदलेगा तो राज का मनोरंजन स्टाईल सिंगल स्क्रीन में राज टाकीज ही एकमात्र एयरकंडीशन छबिगृह है।
शोले और जयं संतोषी मां ने बनाए रेकॉर्ड
– राज टाकीज जिसका पुराना नाम राजकमल था, इसका निर्माण प्रख्यात फिल्मकार वी शांता राम ने करवाया था। 15 जनवरी 1946 में थियेटर बना था। पहली फिल्म दहेज लगी थी। 1956 में इसे कमलकिशोर राठी ने खरीदा।
– ‘शोलेÓ और ‘जय संतोषी मांÓ रायपुर में सबसे ज्यादा चलने वाली फिल्में हैं। इसके अलावा राम और श्याम, गोपी, मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन और बागबां भी खूब चली।
– वर्ष 2007 में सिनेमा में यूएफओ का दौर आया।
– थ्रीडी फिल्मों ने लोगों की पहुंच मल्टीप्लेक्स तक बनाई।

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