नई दिल्ली। भारतीय आईटी सेक्टर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्तमान में, भारतीय सूचना तकनीक क्षेत्र एआई सेवाओं से लगभग 12 अरब डॉलर की राजस्व प्राप्त कर रहा है। यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो यह दर्शाता है कि भारत टेक्नोलॉजी में तेजी से आगे बढ़ रहा है और नई तकनीकों को अपनाने में अग्रणी है।
देश में एआई की क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 20 लाख पेशेवर प्रशिक्षित हैं, जिनमें से 100,000 से 200,000 लोग उन्नत एआई कौशल प्राप्त कर चुके हैं। ये आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि भारत के आईटी क्षेत्र में वर्तमान में तकनीकी दक्षता और नवाचार का स्तर अत्यंत उच्च है।
जानकारों के अनुसार, इस तेजी से बढ़ते माहौल में भारतीय कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी सेवाओं को न केवल डेवलपमेंट स्तर पर बल्कि उत्पादन स्तर तक भी पहुंचा दिया है। इससे न केवल उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की पहचान भी मज़बूत हुई है।
नैसकॉम जैसी प्रमुख संस्थाओं का मानना है कि अब भारतीय आईटी कंपनियां एआई को लेकर योजनाओं को व्यवहार में तेजी से लागू कर रही हैं, जिससे उन्हें अधिक व्यावसायिक अवसर मिल रहे हैं और साथ ही नई तकनीकों के विकास में सहयोग भी बढ़ रहा है। यह संपूर्ण परिदृश्य भारत को विश्व के अग्रणी डिजिटल देशों की श्रेणी में स्थापित कर रहा है।
इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कंपनियां लगातार एआई प्रशिक्षण और कौशल विकास पर ध्यान दे रही हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि तकनीकी पेशेवर नई चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों और भारत का आईटी क्षेत्र भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार रहे।
संक्षेप में, भारतीय आईटी उद्योग एआई में निरंतर वृद्धि और आगे की संभावनाओं के साथ एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है। 12 अरब डॉलर का ये राजस्व और लाखों प्रशिक्षित पेशेवर इस परिवर्तन को प्रमाणित करते हैं, जो आने वाले समय में भारत को डिजिटल क्रांति की मुख्य धारा में लाने का प्रमुख संसाधन साबित होगा।














