गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि अब राज्य में लाखों छोटे चाय के उत्पादकों के लिए किसानों के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर चाय के खेतों को भी शामिल किया जाएगा। यह सुविधा छोटे किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि असम में चाय उद्योग का बड़ा सामाजिक और आर्थिक महत्व है। राज्य के कई भागों में छोटे किसानों के पास सीमित भूमि होती है, जिन पर वे चाय की खेती करते हैं। अब जब यह सुविधा पोर्टल पर उपलब्ध होगी, तो किसानों को अपनी उपज के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी और वे अपनी जमीन का वैध रिकॉर्ड रख सकेंगे।
हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “यह पहल छोटे चाय उत्पादकों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। इसे अपनाने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उनका उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे चाय उद्योग के समग्र विकास में सुधार होगा।”
सरकार ने बताया कि इस पहल से किसानों को कई सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर मिलेगा, जिसमें बीमा, वित्तीय सहायता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा, किसानों को अपनी फसल बेचने में विश्वास और सुविधा मिलेगी, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि संभव होगी।
वहीं, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम असम के चाय उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे छोटे किसानों को सरकारी पोर्टलों के साथ सीधे जुड़ने और अपने अधिकारों की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी। कृषि विभाग भी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए तकनीकी सहायता एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा।
असम सरकार की यह पहल चाय उत्पादन क्षेत्र में नवीनतम विकास और किसानों की बेहतरी की दिशा में एक ठोस प्रयास है। इसे राज्य की कृषि नीतियों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इससे राज्य के चाय उद्योग को नई ऊंचाइयां मिलेगी और किसान समुदाय का आर्थिक सशक्तिकरण होगा।
अंत में, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सभी छोटे और मझोले चाय उत्पादकों से अपील की कि वे इस योजना का लाभ उठाएं और राज्य सरकार के साथ मिलकर असम को भारत का सबसे बड़ा और समृद्ध चाय उत्पादक केंद्र बनाने में योगदान दें।















