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निर्यातकों ने पीयूष गोयल से बैठक में अनुपालन लागत, परीक्षण आवश्यकताएँ और एमएसएमई समस्याओं पर प्रकाश डाला

Exporters highlight compliance costs, testing requirements, MSME issues in meeting with Piyush Goyal

नई दिल्ली: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में देश के निर्यातक समुदाय ने अनुपालन लागत, परीक्षण आवश्यकताओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) से संबंधित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इस दौरान निर्यातकों ने अपने सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों और व्यापारिक बाधाओं पर विस्तार से चर्चा की, जिससे व्यापार के सुचारू संचालन में मदद मिल सके।

वाणिज्य मंत्रालय ने बैठक के बाद जारी की गई एक आधिकारिक घोषणा में बताया कि मंत्री ने निर्यातकों को निरंतर समर्थन देने का भरोसा दिया है। मंत्रालय ने कहा, “मंत्री ने व्यापार में प्रवेश की बाधाओं को कम करने और व्यापार करने की सहजता बढ़ाने के लिए सुविधा प्रदान करने और लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से निरंतर सहायता का आश्वासन दिया है।” इस पहल का उद्देश्य है व्यापार वातावरण को और बेहतर बनाना ताकि निर्यातक और एमएसएमई समुदाय अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहें।

बैठक में बातचीत के दौरान निर्यातकों ने सबसे अधिक समस्या अनुपालन लागत की बताई, जिसमें विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना शामिल है। इसके अलावा, परीक्षण आवश्यकताओं में जटिलताओं और महंगाई से व्यापार की गति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। एमएसएमई सेक्टर की विशेष परेशानियों जैसे वित्तीय संसाधनों की कमी, बाजार तक सीमित पहुँच और तकनीकी सहायता की जरूरत भी बैठक में प्रमुख मुद्दे रहे।

पीयूष गोयल ने निर्यातकों और एमएसएमई प्रतिनिधियों की बात ध्यान से सुनी और उनकी चुनौतियों को समझते हुए वाणिज्य मंत्रालय एवं संबंधित विभागों को तीव्र कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार निर्यातकों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और निरंतर सुधारों के जरिए व्यापारिक माहौल को अधिक अनुकूल बनाने पर काम कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार किए जा रहे सुधार और डिजिटल प्लेटफॉर्म का समुचित उपयोग व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने में सहायक होगा। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि व्यापार की प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति भी बढ़ेगी। एमएसएमई सेक्टर में तकनीकी उन्नयन और वित्तीय सहायता योजनाएं भी निर्यातकों के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती हैं।

इस बैठक ने एक बार फिर देश के निर्यातकों की समस्याओं को सार्वजनिक मंच पर उजागर किया है और सरकार की तत्परता को दर्शाया है कि वह उनके विकर्षणों को दूर करने एवं उद्योग को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसे सकारात्मक कदम आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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