Education

ट्रोजन हॉर्स ने IITs की दीवार में सेंध लगाई

A Trojan horse has breached the IITs

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024: भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्रों द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के शैक्षिक ढांचे में मिथक आधारित प्रश्नों को शामिल करने की योजना ने शैक्षिक और वैज्ञानिक समुदाय में चिंता और बहस को जन्म दिया है। यह प्रस्ताव भारतीय तकनीकी शिक्षा पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है और आधुनिक तकनीकी अनुसंधान तथा शिक्षा की पारंपरिक वैज्ञानिक मान्यताओं के बीच टकराव उत्पन्न कर सकता है।

भारतीय ज्ञान प्रणाली के केंद्र, जो देश की सांस्कृतिक और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हैं, का उद्देश्य है कि IITs में शिक्षा के पाठ्यक्रम में भारतीय मिथकों एवं प्राचीन ज्ञान की झलक मिल सके। उनकी दलील है कि इस कदम से छात्रों में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और परम्पराओं के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही, यह कदम ‘देशी ज्ञान’ को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है।

हालांकि, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि IITs जैसे संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता और वैश्विक मानकों की सुरक्षा के लिए पाठ्यक्रम में मिथक आधारित प्रश्नों का सम्मिलन शैक्षिक अपक्षय का कारण बन सकता है। एक प्रमुख वैज्ञानिक ने बताया, “तकनीकी शिक्षा में तथ्यात्मक और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित ज्ञान देना आवश्यक है। मिथक आधारित विषयों को शिक्षण में शामिल करने से शोध की विश्वसनीयता और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।”

शिक्षा मंत्रालय ने इस विषय पर वैचारिक विमर्श शुरू कर दिया है और IIT निदेशकों के समूह के साथ विचार-विमर्श कर योजना का विस्तार से मूल्यांकन कर रहा है। IIT प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि वे अपनी स्वतंत्रता और शैक्षिक आत्मनिर्णय को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारतीय ज्ञान प्रणाली के तत्वों को समकालीन वैज्ञानिक शिक्षा में समाहित करने के लिए पारंपरिक ज्ञान और विज्ञान के बीच संतुलन बनाए रखना होगा, ताकि छात्रों को वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक जागरूकता दोनों विकसित हो सकें। यह विषय अब शिक्षा नीतिकारों, शिक्षाविदों और छात्रों के बीच प्रमुख चर्चा बन चुका है।

यह देखना रोचक होगा कि भारतीय तकनीकी शिक्षा में यह नया आयाम किस प्रकार लागू होता है और इसका छात्रों और तकनीकी अनुसंधान पर क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, IITs के शैक्षिक ढांचे में इस बदलाव को लेकर सतर्कता और सावधानी के साथ निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

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