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बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा कि संयुक्त ऑटो ‘कार्यस्थल’ नहीं है, PoSH अधिनियम के तहत ICC आदेश को रद्द किया

Bombay High Court says shared auto not 'workplace' under PoSH Act, sets aside ICC order

मुंबई, 22 जून: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि संयुक्त ऑटो को “कार्यस्थल” (workplace) के रूप में नहीं माना जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप एक आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) के निर्णय को रद्द कर दिया गया है। यह निर्णय उस मामले में आया है जिसमें एक भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India – SBI) के कर्मचारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे, जो संयुक्त ऑटो यात्रा के दौरान हुए थे।

इस मामले में, ICC ने प्रारंभिक जांच के बाद कर्मचारी को दोषी ठहराया था। लेकिन बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 22 जून के अपने आदेश में ICC के इस निर्णय को खारिज करते हुए कहा कि संयुक्त ऑटो यात्रा को कार्यस्थल के दायरे में नहीं रखा जा सकता। न्यायालय के अनुसार, PoSH (Prevention of Sexual Harassment) अधिनियम के तहत केवल उन्हीं स्थानों को कार्यस्थल माना जा सकता है जहां नौकरी के सिलसिले में कर्मचारी अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं।

न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में यह भी जोड़ा कि संयुक्त ऑटो यात्रा को कार्यस्थल मानना अधिनियम के दायरे का विस्तार करना होगा, जो वर्तमान कानूनी प्रावधानों के तहत संभव नहीं है। आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि यात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाली घटनाओं की जांच का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन उन्हें PoSH अधिनियम के तहत कार्यस्थल से बाहर रखा जाना चाहिए।

इस फैसले से कई संगठनों और न्यायिक विशेषज्ञों में चर्चा शुरू हो गई है। जबकि कई लोग इस फैसले को कर्मचारी सुरक्षा के दृष्टिकोण से विवादास्पद मान रहे हैं, वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे कानून के दायरे का सही प्रबंधन बताते हुए कहते हैं कि यौन उत्पीड़न मामलों के लिए अलग-अलग कानूनी और अनुशासनात्मक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

राज्य बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारीयों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे संस्थान के आंतरिक जांच तंत्र के काम करने के तरीके को समझने में मदद मिलेगी। वहीं, कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी समाप्त नहीं हुई हैं, और माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद भी यौन उत्पीड़न के मामलों की संवेदनशीलता को समझना और बेहतर कानून बनाना आवश्यक होगा।

बॉम्बे उच्च न्यायालय के इस आदेश का असर अन्य राज्यों और उच्च न्यायालयों में चल रहे समान मामलों पर भी पड़ सकता है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि PoSH अधिनियम के तहत कार्यस्थल की परिभाषा कैसे लागू होती है। अधिनियम का उद्देश्य तो कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल प्रदान करना है, लेकिन कानून की सीमा और व्याख्या भी न्यायपालिका के समक्ष साफ होनी चाहिए।

सारांश में, बॉम्बे उच्च न्यायालय का यह फैसला PoSH अधिनियम की व्याख्या को लेकर नए आयाम खोलता है और भविष्य में इस विषय पर और व्यापक बहस और सुधार की संभावना को बढ़ाता है।

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