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सीडब्ल्यूएमए ने जलाशय के पानी के संतुलित उपयोग की अपील की, कावेरी जल रिहाई पर निर्णय स्थगित

CWMA asks basin States to use reservoir water judiciously, defers decision on Cauvery releases

नई दिल्ली। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) की 52वीं बैठक में जल संसाधनों के न्यायसंगत और सावधानीपूर्वक उपयोग पर जोर देते हुए जलाशयों के पानी के सही प्रबंधन की अपील की गई है। यह बैठक मेकेदटु बैलेंसिंग जलाशय परियोजना पर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच आयोजित की गई।

सीडब्ल्यूएमए के सदस्यों ने कहा कि कावेरी नदी के जल वितरण से संबंधित किसी भी निर्णय लेने में सभी पक्षों की सहमति और जल संरक्षण के व्यापक हित को ध्यान में रखना जरूरी है। इस बैठक में, कावेरी नदी के जल के संग्रहण और उपयोग की योजना को लेकर राज्य सरकारों के बीच मतभेद के कारण जल रिहाई पर तत्काल कोई फैसला नहीं लिया गया।

बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों ने राज्य सरकारों से अपील की कि वे जलाशयों में मौजूद पानी का सतर्क एवं विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें ताकि नदी के जल संसाधनों की चिंता बनी रहे और सूखे जैसी विपत्तियों से निपटा जा सके। खासतौर पर सूखे के समय जल का संरक्षण और उचित वितरण आवश्यक माना गया।

मेकेदटु परियोजना, जो कर्नाटक में प्रस्तावित बैलेंसिंग जलाशय है, ने तमिलनाडु सरकार में व्यापक चर्चा और विरोध को जन्म दिया है। तमिलनाडु का तर्क है कि इससे उनकी हिस्से की कावेरी नदी के पानी की आपूर्ति प्रभावित होगी। वहीं, कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास और जल आपूर्ति की दृष्टि से आवश्यक है।

सीडब्ल्यूएमए की इस बैठक में इन विवादित मुद्दों पर सभी संबंधित पक्षों की राय सुनी गई, लेकिन किसी भी पक्ष को असंतुष्ट किए बिना निर्णय लेने में सावधानी बरती गई। इस कारण, कावेरी नदी के जल के अगले चरण के वितरण को लेकर फैसला फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण की नीति में सहयोग और सहमति आधारभूत होना चाहिए, क्योंकि ये नदियाँ कई राज्यों के लिए जीवनदायिनी स्रोत हैं। हरित और टिकाऊ जल प्रबंधन रणनीतियों के तहत राज्यों को जल विशेषज्ञों और जल प्राधिकरणों के परामर्श से काम करना होगा।

बैठक के समापन पर, सीडब्ल्यूएमए ने जलाशयों के पानी के विवेकपूर्ण और न्यायसंगत उपयोग के प्रति एक सकारात्मक संदेश दिया और सभी संबंधित पक्षों से शांति और सहयोग का आग्रह किया ताकि कावेरी नदी के पानी का सतत और संतुलित प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।

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