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केरल कैबिनेट ने पीएम श्री योजना के क्रियान्वयन के लिए उप-समिति बनाई; सीएम ने कहा ‘योजना को जारी रखना मजबूरी है’

Kerala Cabinet forms sub-committee to study PM SHRI implementation; CM says ‘forced to’ continue with scheme

तिरुवनंतपुरम। केरल सरकार ने प्रधानमंत्री स्कूल पुनर्निर्माण योजना (पीएम श्री) के विवादित परियोजना को जारी रखने के फैसले के पीछे केंद्र सरकार के साथ पहले की गई समझौते को जिम्मेदार बताया है। वर्तमान केरल के मंत्री सत्यजीत सत्यीसन ने स्पष्ट किया कि पिछले एलडीएफ सरकार ने पहले ही केंद्र सरकार के साथ इस योजना पर समझौता कर लिया था और उससे धनराशि भी प्राप्त कर ली गई थी, इसलिए मौजूदा सरकार के लिए इसे रद्द करना संभव नहीं है।

मंत्री सत्यीसन ने कहा, “हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा क्योंकि पिछली सरकार ने इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार के साथ अनुबंध कर लिया था और उससे धन की राशि भी ली गई। इससे यह योजना विवादों के बीच भी जारी रहनी होगी।” उन्होंने कहा कि सरकार को योजना के प्रावधानों का पालन करना पड़ रहा है, भले ही इसे लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी हो रहा हो।

पीएम श्री योजना का उद्देश्य स्कूलों को आधुनिक बनाने और उनकी आधारभूत संरचनाओं में सुधार करना है। हालांकि, योजना को लेकर केरल में कुछ स्थानों पर विवाद पैदा हुआ है, जहां स्थानीय नेताओं और अभिभावकों ने इसे आलोचनात्मक रूप से देखा है। उन्होंने योजना पर पारदर्शिता की कमी और अनुचित कार्यान्वयन की शिकायत की है।

सत्यीसन ने इस बारे में बताया कि कैबिनेट ने एक उप-समिति भी गठित की है, जो योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी तथा इसकी प्रगति और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। इस उप-समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह सभी पक्षों की चिंताओं को सुनकर उचित सुझाव देगी ताकि योजना सही दिशा में आगे बढ़ सके।

इस बीच, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी कहा है कि सरकार को मजबूरन इस योजना को जारी रखना पड़ रहा है क्योंकि समझौता पहले ही हो चुका है और इससे वापस हटना कानूनी एवं प्रशासनिक रूप से जटिल होगा। उनकी यह टिप्पणी विवादास्पद योजना को लेकर बढ़ती असंतोष को थोड़ा नियंत्रित करने की कोशिश है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पीएम श्री योजना के विवाद ने केरल की राजनीति में नया आयाम जोड़ दिया है, जहां शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता के बीच इस योजना की संवेदनशीलता ने सरकार के सामने एक चुनौती पेश की है। अब देखना होगा कि उप-समिति की रिपोर्ट और सरकार की आगे की रणनीति इस बहस को कैसे प्रभावित करती है।

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