नई दिल्ली, दिल्ली
देश में घरेलू हवाई यात्रा की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। गर्मियों की छुट्टियों के दौरान यात्रा करने वाले लोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसका असर मई 2026 के विमानन आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में देशभर की घरेलू एयरलाइंस से करीब 1.54 करोड़ यात्रियों ने हवाई सफर किया। यह पिछले वर्ष मई के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत अधिक है, जब 1.40 करोड़ यात्रियों ने उड़ान भरी थी।
मासिक आधार पर भी घरेलू विमानन क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन किया। अप्रैल 2026 में जहां 1.38 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की थी, वहीं मई में यह संख्या बढ़कर 1.54 करोड़ पहुंच गई। इस तरह केवल एक महीने में करीब 11.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों की छुट्टियों और पर्यटन गतिविधियों में तेजी इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण रही।
हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन लागत में बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों की परिचालन रणनीति को प्रभावित किया। इसके बावजूद कंपनियों ने मांग के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से अपनी उड़ान क्षमता बढ़ाई, ताकि यात्रियों की जरूरत पूरी करने के साथ-साथ अतिरिक्त आर्थिक दबाव से भी बचा जा सके।
सीटों के उपयोग (लोड फैक्टर) के मामले में आकासा एयर सबसे आगे रही। मई के दौरान कंपनी की 92.5 प्रतिशत सीटें भरी रहीं, जो सभी प्रमुख एयरलाइंस में सबसे अधिक है। इसके बाद स्पाइसजेट का लोड फैक्टर 87.4 प्रतिशत, इंडिगो का 86.4 प्रतिशत और एयर इंडिया समूह का 83.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ अधिकांश एयरलाइंस ने अपनी उपलब्ध सीटों का प्रभावी उपयोग किया।
बाजार हिस्सेदारी की बात करें तो इंडिगो ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी। कंपनी ने मई 2026 में 99.91 लाख यात्रियों को सेवा प्रदान की और उसकी बाजार हिस्सेदारी 64.9 प्रतिशत रही। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को मिलाकर एयर इंडिया समूह ने 39.33 लाख यात्रियों के साथ 25.6 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की। आकासा एयर ने 8.90 लाख यात्रियों के साथ 5.8 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल की, जबकि स्पाइसजेट की हिस्सेदारी 2.5 प्रतिशत रही। फ्लाई 91, स्टार एयर और एलायंस एयर की हिस्सेदारी क्रमशः 0.4 प्रतिशत, 0.5 प्रतिशत और 0.3 प्रतिशत दर्ज की गई।
डीजीसीए के अनुसार, मई 2026 में घरेलू उड़ानों की कुल रद्द होने की दर केवल 0.55 प्रतिशत रही। रद्द हुई उड़ानों में 45.1 प्रतिशत तकनीकी कारणों से प्रभावित रहीं, जबकि 26.6 प्रतिशत परिचालन संबंधी कारणों और 15.3 प्रतिशत खराब मौसम की वजह से रद्द करनी पड़ीं।
घरेलू विमानन क्षेत्र के ताजा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत में हवाई यात्रा की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। यदि आने वाले महीनों में परिचालन लागत नियंत्रित रहती है और एयरलाइंस अपनी क्षमता संतुलित तरीके से बढ़ाती हैं, तो घरेलू विमानन उद्योग में आगे भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिल सकती है।

















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