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नैवेद्य फ़ूड के खिलाफ राज्य उपभोक्ता फोरम का फैसला

रायपुर: ज्ञात हो कि आरटीआई कार्यकर्ता संजीव अग्रवाल को तीन साल पहले के एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम रायपुर, छग से न्याय मिला था। संजीव अग्रवाल ने तीन साल पहले दिनांक 16.08.2016 को नैवेद्य फूड प्रोडक्ट से मिठाई खरीदी लेकिन वो मिठाई खराब निकली परंतु इस्तेमाल होने के कारण उसकी वापसी या जांच संभव नहीं थी। तत्पश्चात संजीव अग्रवाल ने दिनांक 23.08.2016 को नैवेद्य फूड प्रोडक्ट की मुख्य शाखा से पुनः गिफ्ट पैक मिठाई खरीदी जिसे उन्होंने जांच के लिए रायपुर स्थित खाद्य विश्लेषक, राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, कालीबाड़ी के पास भेजा। दिनांक 03.09.2916 को जो प्रयोगशाला से प्राप्त जांच रिपोर्ट के मुताबिक मिठाई खाने योग्य नहीं पाई गई जिसके बाद उन्होंने शिकायत की थी। जब तीन साल बाद संजीव अग्रवाल को इंसाफ मिला, जिसके फलस्वरूप नैवेद्य फूड प्रोडक्ट द्वारा संजीव अग्रवाल को मिठाई की कीमत 390 रुपए और उस पर 9 % के दर से तीन साल का ब्याज़ व 5000 रुपए मानसिक कष्ट के लिए और साथ ही 2000 रुपए अधिवक्ता शुल्क और वादव्यय के रूप में अदा करना था। इसके बाद बौखला हुए नैवेद्य फूड प्रोडक्ट के मालिक सुरेश पारख को अपनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम रायपुर, छग के खिलाफ़ संजीव अग्रवाल के विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, पंडरी, रायपुर में एक याचिका दायर की। उन्होंने अपने वकील के माध्यम से मनगढ़ंत तरीके से इस प्रकरण को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया और पूरे प्रकरण को घुमा फिरा कर पेश किया। दूसरी और अधिवक्ता श्री सोमकांत यदु ने संजीव अग्रवाल की तरफ से पैरवी की और उनका पक्ष रखा चूंकि मामला धांधली का था। लेकिन पूरी सुनवाई के बाद अंत में छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने याचिकाकर्ता सुरेश पारख की याचिका को ख़ारिज कर दिया। संजीव अग्रवाल ने कहा कि उनका कानून के प्रति विश्वास और ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि अंत में जीत सच और साहस की ही होती है।

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