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बंगाल में बिना मुकदमे 12 माह तक निरोध और दंगाइयों की संपत्ति जब्त करने वाले दो कानून लागू

कोलकाता, पश्चिम बंगाल:

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार से दो नए कानून लागू हो गए हैं। इन कानूनों के लागू होने के बाद पुलिस और प्रशासन को संगठित अपराध, हिंसक प्रदर्शन, दंगों और असामाजिक गतिविधियों से निपटने के लिए व्यापक अधिकार मिल गए हैं। नए प्रावधानों के तहत संदिग्ध व्यक्तियों को बिना मुकदमे के अधिकतम 12 महीने तक निरोध में रखा जा सकेगा, जबकि दंगों या हिंसक घटनाओं में सार्वजनिक अथवा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की संपत्ति कुर्क कर क्षतिपूर्ति की जा सकेगी।

ये दोनों कानून ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण अधिनियम, 2026’ तथा ‘पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के रूप में विधानसभा से पारित होने के बाद अब प्रभावी हो गए हैं। सरकार का कहना है कि इनका उद्देश्य संगठित अपराध, तोड़फोड़, हिंसा और असामाजिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

नए सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस आयुक्त ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ निरोधात्मक आदेश जारी कर सकेंगे, जिनके असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने की आशंका हो। हालांकि इस आदेश को 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी और तीन सप्ताह के अंदर उच्च न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी।

कानून में “गुंडा” की परिभाषा का दायरा भी पहले की तुलना में व्यापक किया गया है। इसमें संगठित अपराध गिरोहों के सदस्य, उनके सहयोगी या वित्तपोषक, हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में बार-बार अपराध करने वाले व्यक्ति, अवैध खनन, बालू खनन, भूमि कब्जा, तस्करी तथा ऐसे लोग शामिल किए गए हैं, जिनकी गतिविधियों से सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, जिससे पुलिस बिना वारंट तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी कर सकेगी। इसके अलावा संदिग्ध व्यक्तियों को अधिकतम एक वर्ष तक किसी विशेष क्षेत्र में प्रवेश करने से भी रोका जा सकेगा।

दूसरे कानून लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत दंगे, आगजनी या हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपितों की संपत्ति कुर्क कर उसकी नीलामी की जा सकेगी। इसके लिए दावों के निपटारे हेतु एक क्लेम्स कमीशन का भी प्रावधान किया गया है।

सरकार का कहना है कि इन कानूनों से संगठित अपराध, राजनीतिक हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। वहीं, विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार समूहों ने इन कानूनों पर चिंता जताते हुए आशंका व्यक्त की है कि व्यापक अधिकारों का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों या असहमति जताने वालों के खिलाफ किया जा सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ये दोनों कानून पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं। हालांकि इनका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इनका इस्तेमाल अपराध नियंत्रण तक सीमित रहता है या इनके दुरुपयोग को रोकने के लिए निर्धारित कानूनी निगरानी तंत्र प्रभावी ढंग से काम करता है।

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