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इंस्टाग्राम विक्रेता को 10 महीने देरी से ₹807 की ड्रेस पहुँचाने पर ₹10,000 जुर्माना भुगतान का आदेश

Instagram seller ordered to pay Rs 10,000 after delaying Rs 807 dress by 10 months

केरल के एक उपभोक्ता आयोग ने एक ऑनलाइन कपड़े बेचने वाले विक्रेता को आदेश दिया है कि वे ₹807 की ड्रेस की वापसी राशि लौटाएं और ₹10,000 का मुआवजा एवं खर्च भी चुकाएं। यह फैसला बड़े ही सख्त तरीके से अधिवक्ता ने दिया जो ऑनलाइन खरीदारी के दौरान हुई देरी को सेवा की कमी माना।

आयोग ने पाया कि विक्रेता ने ग्राहक द्वारा ऑर्डर किए गए ड्रेस को लगभग 10 महीने की विलंब के बाद ही ग्राहक तक पहुंचाया। इतनी लंबी देरी को न्यायिक आयोग ने अनुचित और अस्वीकार्य माना।

विक्रेता ने अपनी ओर से यह देरी एक दुर्घटना को कारण बताते हुए सफाई दी, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार्य कारण के तौर पर नहीं माना। उसने स्पष्ट किया कि ग्राहक के साथ हुई असुविधा और विलंब के लिए विक्रेता जिम्मेदार है।

उपभोक्ता आयोग ने कहा, “ऑनलाइन बुक की गई कोई भी वस्तु निश्चित समय में ग्राहक तक पहुँचना आवश्यक है। इससे उपभोक्ताओं की संतुष्टि बनी रहती है और बाजार में भरोसा कायम रहता है। ऐसे मामलों में देर या विलंब उपभोक्ता अधिकारों का हनन है।”

आयोग ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की देरी एक ‘सेवा की कमी’ है और इससे ग्राहक को होने वाला नुकसान विक्रेता को मुआवजे के रूप में देना होगा। यह भी जिक्र किया गया कि इस फैसले से ऑनलाइन विक्रेताओं को भविष्य में समय सीमा का पालन करने की प्रेरणा मिलेगी।

केरल उपभोक्ता आयोग के इस फैसले से यह साफ हुआ है कि ऑनलाइन शॉपिंग में ग्राहकों को अधिकार और सुरक्षा मिलती रहेगी। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे किसी भी देरी या शिकायत की स्थिति में जल्द से जल्द उपभोक्ता आयोग से संपर्क करें ताकि विनियमित न्याय प्रक्रिया से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें।

यह निर्णय एक मिसाल भी है कि ऑनलाइन शॉपिंग के समय विक्रेताओं को अपनी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखनी चाहिए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रकार के निर्णय उपभोक्ताओं के विश्वास को बनाए रखने में सहायक हैं।

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