राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण रिपोर्ट सौंपी है। आयोग ने कहा है कि मौजूदा मुस्लिम पर्सनल लॉ में कई कानूनी अस्पष्टताएं हैं, जिनकी वजह से महिलाओं को बराबरी और न्याय पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट में बाल विवाह, असमान विरासत, बहुविवाह और तलाक से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई गई है। आयोग का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट और एक समान कानून की जरूरत है, ताकि महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सामाजिक सम्मान मिल सके।
एनसीडब्ल्यू ने सुझाव दिया है कि मुस्लिम विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए और तलाक की प्रक्रिया में महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जाएं। इसके साथ ही गुजारा भत्ता, बच्चों की कस्टडी और वैवाहिक संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी को मजबूत करने की मांग की गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने चाहिए। आयोग ने कानूनी सहायता केंद्र, हेल्पलाइन और पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास की व्यवस्था को और मजबूत करने की सिफारिश की है।
एनसीडब्ल्यू ने केंद्र सरकार से जल्द कार्रवाई की अपील करते हुए कहा कि संविधान के अनुसार सभी महिलाओं को समानता, गरिमा और न्याय का अधिकार मिलना चाहिए।















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