नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश पुरूषेन्द्र कुमार कौरव की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को तत्काल बहाल करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने इस मामले में निर्देश दिया है कि श्री दीपक को आईटी नियमावली के तहत गठित समीक्षा समिति के पास आवेदन करना चाहिए।
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ी किसी भी शिकायत या विवाद के लिए, संबंधित पक्षों को पहले नियमों के अनुसार समीक्षा पैनल से संपर्क करना आवश्यक है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिना समीक्षा समिति की राय लिए किसी अकाउंट को पुनः सक्रिय करना उचित नहीं होगा।
श्री दीपक, जो इस मुकदमे के पक्षकार हैं, को निर्देश दिया गया है कि वे पहले उक्त समीक्षा समिति के पास जाकर अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करें। कोर्ट ने यह निर्देश सुरक्षा और सूचना तकनीकी नियमों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए दिया है।
केंद्रीय सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया गया है ताकि वे अपने पक्ष को प्रस्तुत कर सकें। यह मामला सोशल मीडिया कंपनियों और उपयोगकर्ताओं के बीच विवादित मामलों के निपटारे में कोर्ट की भूमिका को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्लेटफॉर्म नियमों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन आवश्यक है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
यह भी उल्लेखनीय है कि इस तरह के केस आगामी समय में सूचना प्रौद्योगिकी के दायरे में आने वाले विवादों की अधिक स्पष्टता और नियमबद्धता सुनिश्चित कर सकते हैं। सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को ध्यान में रखते हुए, अदालतों का यह रुख उपयोगकर्ताओं और प्रबंधकों दोनों के लिए निर्देशात्मक है।
अखिल भारतीय जनमत के नजरिए से देखा जाए तो न्यायालय का यह कदम सोशल मीडिया पर अनुशासन और कानूनी प्रक्रिया की प्रासंगिकता को बढ़ावा देता है, जो डिजिटल युग में अत्यंत आवश्यक है।














