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रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से बेहाल भारत, UN की चेतावनी- अगले 5 साल और खतरनाक होंगे

भारत इस समय भीषण गर्मी की मार झेल रहा है और आने वाले सालों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपनी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे खतरनाक दौर अभी बाकी है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2026 से 2030 के बीच वैश्विक तापमान के 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा पार करने की संभावना 75 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इस चेतावनी का असर भारत में साफ दिखाई दे रहा है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। उत्तर भारत के कई हिस्से इस समय भीषण लू की चपेट में हैं। गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

WMO ने कहा है कि कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का लगातार बढ़ता उपयोग धरती को तेजी से गर्म कर रहा है। इसके चलते आने वाले वर्षों में बाढ़, सूखा, जंगलों में आग और हीटवेव जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में भारत, यूरोप और एशिया के कई देशों को विशेष रूप से संवेदनशील बताया गया है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी कई राज्यों के लिए गर्मी और लू का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ और पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी का असर बना रहेगा। वहीं पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 28 से 30 मई के बीच लू चलने की संभावना जताई गई है।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में आंधी और बारिश के कारण तापमान में अस्थायी राहत मिलने के संकेत भी हैं। IMD के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में अगले कुछ दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी और मई के अंतिम दिनों से जून की शुरुआत तक फिर तापमान में तेजी से वृद्धि होगी।

मौसम विभाग ने किसानों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में किसानों से मक्का, मूंग, उड़द, गन्ना और सब्जियों की नियमित सिंचाई करने को कहा गया है। आम, केला और पपीता जैसे फलों के पौधों को तेज गर्मी से बचाने के लिए मल्चिंग और बार-बार पानी देने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा मौसम विभाग ने आंधी और तूफान को लेकर भी चेतावनी जारी की है। 29 मई को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ इलाकों में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले झोंके आने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर भारत के कई हिस्सों में ओलावृष्टि का भी अनुमान लगाया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का नहीं बल्कि वर्तमान का संकट बन चुका है। लगातार बढ़ते तापमान और बदलते मौसम के पैटर्न ने खेती, स्वास्थ्य और जल संसाधनों पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। आने वाले वर्षों में यदि कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया तो स्थिति और अधिक चिंताजनक हो सकती है।

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