United Nations

COVID-19 : urges support for studies focused on virus source

The World Health Organization (WHO) has said that in order to test all hypotheses and conjectures related to the source of the Kovid-19 virus, all countries will have to make efforts together, forgetting mutual differences. There is also an unproven hypothesis claiming that the virus was prepared in the laboratory. The UN Health Agency has announced this effect late on Thursday night. Earlier in March, the Health Organization and China had issued a joint report under the investigation of the source of the coronavirus.

According to the UN agency, in the review of this report, not enough scientific facts are available to confirm the source of the novel coronavirus.

In view of this, in order to investigate the possibility of virus leakage from a laboratory, it is important to have all kinds of data so that future health threats can be prevented.

The health organization has called on all governments that the current situation will have to be kept away from politics, and cooperation will have to be made to speed up the studies related to the source of the virus.

In addition, a common framework will have to be developed keeping in mind the viruses that are likely to cause global pandemics.

“We urge governments to put aside differences and work together to ensure all necessary data and accessibility so that the next series of studies can be started as soon as possible.”

The UN agency has clarified in a detailed statement that it has been decided to launch a new series of scientific studies.

In this sequence, it is planned to test all the hypotheses as to how an unknown virus passed from animals to humans.

Emphasis on Transparency – The International Scientific Advisory Group for Origins of Novel Pathogens / SAGO is a group of independent experts tasked with coordinating the studies mentioned in the report released in March 2021 Is.

He said that keeping in mind the transparency, nominations are welcome from all countries for this commission.

This group will work in the same way as the first mission to China, as well as a group to trace the source of avian influenza, Lassa virus and Ebola virus.

It has been told that efforts are being made to include a variety of scientific skills and expertise in the group so that the sources of emergence of other viruses can be identified in the future.

According to the UN agency, the goal of this mission is not to blame or point fingers.

Sources of Coronavirus – It is very important to know how the COVID-19 pandemic started so that the sources of such incidents from animals to humans can be established.

The availability of sensitive information has been described as critical to the success of this study by the UN Health Agency.

In this sequence, there is a need to further review the data and information in the initial cases of infection.

Also, before the spread of coronavirus is declared a global pandemic in the year 2019, blood samples of potential infected will also have to be provided.

Information about the detection of the virus in blood samples in 2019 by other countries, including Italy, has already been submitted to the UN Health Agency.

In this connection, the same request has been made to China so that the studies focused on locating the source can be carried forward at the earliest.

कोविड-19: वायरस के स्रोत पर केंद्रित अध्ययनों के लिये समर्थन का आग्रह

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि कोविड-19 वायरस के स्रोत सम्बन्धी सभी परिकल्पनाओं व अनुमानों की परख के लिये, सभी देशों को आपसी मतभेदों को भुलाकर एक साथ मिलकर प्रयास करने होंगे. इनमें प्रयोगशाला में वायरस को तैयार किये जाने का दावा करने वाला अप्रमाणित अनुमान भी है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने गुरूवार देर रात इस आशय की घोषणा की है. इससे पहले मार्च महीने में स्वास्थ्य संगठन और चीन ने कोरोनावायरस के स्रोत की पड़ताल करने के तहत एक साझा रिपोर्ट जारी की थी.

यूएन एजेंसी के मुताबिक इस रिपोर्ट की समीक्षा में नॉवल कोरोनावायरस के स्रोत की पुष्टि के लिये पर्याप्त वैज्ञानिक तथ्य उपलब्ध नहीं है.

इसके मद्देनज़र, किसी प्रयोगशाला से वायरस लीक होने होने की आशंका की पड़ताल के लिये, सभी प्रकार के डेटा का होना ज़रूरी है ताकि भविष्य में स्वास्थ्य ख़तरों की रोकथाम हो सके.

स्वास्थ्य संगठन ने सभी सरकारों का आहवान किया है कि मौजूदा हालात को राजनीति से दूर रखा जाना होगा, और वायरस के स्रोत सम्बन्धी अध्ययनों को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिये सहयोग करना होगा.

इसके अलावा, वैश्विक महामारी का कारण बनने की सम्भावना वाले वायरसों को ध्यान में रखते हुए एक साझा फ़्रेमवर्क विकसित किया जाना होगा.

“हम सरकारों से मतभेदों को दूर रखने और साथ मिलकर सभी ज़रूरी डेटा व सुलभता सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं ताकि अध्ययनों की अगली श्रृंखला को जल्द से जल्द शुरू किया जा सके.”

यूएन एजेंसी ने एक विस्तृत बयान में स्पष्ट किया है कि वैज्ञानिक अध्ययनों की एक नई श्रृंखला को शुरू करने का निर्णय लिया गया है.

इस क्रम में सभी परिकल्पनाओं (Hypotheses) को परखे जाने की योजना है कि एक अज्ञात वायरस किस तरह पशुओं से मनुष्यों तक पहुँचा.

पारदर्शिता पर ज़ोर – नॉवल वायरस के स्रोत के लिये अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सलाहकारी समूह (International Scientific Advisory Group for Origins of Novel Pathogens / SAGO) स्वतंत्र विशेषज्ञों का एक समूह है, जिसे मार्च 2021 में जारी रिपोर्ट में उल्लेखित अध्ययनों के लिये समन्वय का दायित्व सौंपा गया है.

उन्होंने कहा कि पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए, इस आयोग के लिये सभी देशों से नामांकनों का स्वागत है.

यह समूह पहले चीन जाने वाले मिशन के साथ-साथ एवियन इन्फ़्लुएन्ज़ा, लस्सा वायरस और इबोला वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिये गठिन समूह की तरह ही काम करेगा.

बताया गया है कि विविध प्रकार के वैज्ञानिक कौशलों व विशेषज्ञताओं को समूह में शामिल करने के लिये प्रयास किये जा रहा है ताकि भविष्य में अन्य वायरसों के उभरने के स्रोतों की शिनाख़्त की जा सके.

यूएन एजेंसी के मुताबिक इस मिशन का लक्ष्य दोषारोपण करना या उंगली उठाना नहीं है.

कोरोनावायरस का स्रोत – यह जानना बेहद अहम है कि कोविड-19 महामारी किस तरह शुरू हुई ताकि पशुओं से मनुष्यों में पहुँचने वाली ऐसी घटनाओं के स्रोतों को स्थापित किया जा सके.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के इस अध्ययन की सफलता के लिये सम्वेदनशील जानकारी की उपलब्धता को महत्वपूर्ण क़रार दिया गया है.

इस क्रम में, संक्रमण के शुरुआती मामलों में आँकड़ों व जानकारी की और समीक्षा किये जाने की ज़रूरत है.

साथ ही वर्ष 2019 में कोरोनावायरस के फैलाव को वैश्विक महामारी घोषित किये जाने से पहले, सम्भावित संक्रमितों के रक्त के नमूनों को भी मुहैया कराया जाना होगा.

इटली सहित अन्य देशों द्वारा 2019 में रक्त के नमूनों में वायरस के मिलने की जानकारी, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी को पहले ही सौंपी जा चुकी है.

इसी सिलसिले में यही आग्रह चीन से भी किया गया है ताकि स्रोत का पता लगाने पर केंद्रित अध्ययनों को जल्द से जल्द आगे बढ़ाया जा सके.

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Mazhar Iqbal

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