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EVM मशीनों के बारे में ट्रंप का दावा कितना सही?

तो क्या हैं ट्रंप के दावे और उनमें कितना दम है?
ट्रंप: “डोमिनियन ने देश भर में हमारे 27 लाख वोट डिलीट कर दिए”
ट्रंप अपने समर्थक और रूढ़िवादी समाचार नेटवर्क ‘आउटलेट वन अमेरिकन न्यूज़ नेटवर्क’ (ओएएनएन) की एक रिपोर्ट के आधार पर ये दावा करते हैं.
इसमें लिखा है, “देश भर में राष्ट्रपति ट्रंप के लिए डाली गई लाखों वोटों को डिलीट किया.” ओएएनएन की रिपोर्ट में चुनाव की निगरानी करने वाले एक ग्रुप एडिसन रिसर्च का एक बिना जाँचा हुआ डाटा इस्तेमाल किया गया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी चुनावों में इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम की आलोचना करते हुए कहा है कि इसकी वजह से उन्हें लाखों वोटों का नुक़सान हुआ.
ये वोटिंग मशीनें डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स नाम की कंपनी बनाती है. ट्रंप ने तरह-तरह के आरोप लगाए हैं, जैसे इन मशीनों से वोट डिलीट कर दिए गए और उनके विरोधियों ने कंपनी पर अनुचित प्रभाव डाला है.
लेकिन कंपनी के अध्यक्ष लैरी रोसीन ने कहा, “एडिसन रिसर्च ने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं लिखी है और ना हमारे पास वोटिंग में धोखाधड़ी का कोई सबूत है”.
ओएएनएन ने भी अपने दावे को लेकर कोई सबूत नहीं दिया है.
ट्रंप और उनके समर्थक फॉक्स न्यूज़ की एक रिपोर्ट को भी शेयर कर रहे हैं जिसमें एंकर शॉन हेनिटी का दावा है कि डोमिनियन वोटिंग मशीनों ने महत्वपूर्ण राज्यों में ट्रंप के वोटों को बाइडन के वोटों में बदल दिया. इस रिपोर्ट में मिशिगन की एंट्रिम काउंटी क्षेत्र में आई दिक्कतों के बारे में बताया गया जहां डोमिनियन मशीनें इस्तेमाल की गई थी. दावा किया गया कि इसी तरह दूसरी काउंटी में भी सॉफ्टवेयर में समस्या हो सकती है. एंट्रिम काउंटी में समस्या आई थी लेकिन वो दिक़्क़त डोमिनियन के सॉफ्टवेयर में नहीं थी. मिशिगन के सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट जॉसलीन बेनसन ने बताया कि ये समस्या मानवीय भूल की वजह से हुई थी. एंट्रिम काउंटी के क्लर्क ने मशीन में रिपोर्टिंग फंक्शन ठीक से चालू नहीं किया था, इसलिए शुरूआती नतीजे ग़लत आए थे और इसमें बाइडन को तीन हज़ार वोटों से जीत मिली थी.
चुनाव अधिकारियों ने इस पारंपरिक रिपब्लिकन क्षेत्र में असामान्य नतीजा देखा तो उन्होंने रिपोर्टिंग फंक्शन को फिर से चलाया और फिर से गिनती होने के बाद ट्रंप को ढाई हज़ार वोटों से जीत मिली.
बेनसन ने कहा कि शुरूआती ग़लती जल्दी ही पकड़ ली गई और उसे सुधार लिया गया और अगर ऐसा नहीं भी होता तो बाद में पता चल जाता क्योंकि उनका चेकिंग सिस्टम ऐसी ही ग़लतियां पकड़ने के लिए बनाया गया है.
उन्होंने कहा, “ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि राज्य में ये गलती कहीं और हुई हो.” एंकर शॉन हेनिटी ने जॉर्जिया का भी नाम लिया जहां डोमिनियन मशीनों का काफ़ी इस्तेमाल हुआ था. लेकिन जॉर्जिया के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट का कहना है कि कुछ जगह देरी हुई लेकिन सॉफ्टवेयर ने वोटों की सही गिनती की.
डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स ने भी एक बयान जारी किया है, “डोमिनियन को लेकर वोट बदलने और डिलीट करने के जो दावे किए जा रहे हैं वो शत प्रतिशत ग़लत हैं.”
ट्रंप: “वामपंथी दलों का है डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स”
ट्रंप का ये दावा सही नहीं है. ये कंपनी ‘वामपंथी दलों’ की नहीं है. इस कंपनी ने अतीत में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों के लिए चंदा दिया है.
ये स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप रेडिकल लेफ़्ट कह कर किसके बारे में बात कर रहे हैं. शायद वह ऑनलाइन फैलाए जा रहे दावे की ओर इशारा कर रहे हैं जिसमें कहा जा रहा है कि कंपनी के रिश्ते क्लिंटन परिवार और अन्य डेमोक्रेट नेताओं के साथ हैं जिसमें स्पीकर नैन्सी पलोसी भी शामिल हैं. ये साफ़ करना भी ज़रूरी है कि डोमिनियन के सीधे-सीधे मालिकाना हक़ और कंपनी के लॉबिंग या सामाजिक काम के लिए दिए चंदे की बात में अंतर है. कंपनी ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों के लिए चंदा दिया है लेकिन किसी कंपनी के लिए सरकारी कॉन्ट्रैक्ट लेने के लिए लॉबिंग करना भी असामान्य बात नहीं है. डोमिनियन वोटिंग ने एक बयान जारी किया है कि वह एक निष्पक्ष अमेरिकी कंपनी है और पलोसी परिवार या क्लिंटन ग्लोबल इनिशियेटिव के साथ कोई मालिकाना रिश्ता नहीं है. क्लिंटन फाउंडेशन ने भी एक बयान जारी किया है कि उसका डोमिनियन वोटिंग सिस्टम्स से कोई लेना-देना नहीं है, ना ही वे कंपनी के किसी ऑपरेशन से जुड़े थे और ना जुड़े हैं. डोमिनियन ने क्लिंटन फाउंडेशन को 2014 में चंदा दिया था और सामाजिक कार्य के तौर पर ये वादा किया था कि कंपनी ग़रीब देशों में चुनावी तकनीक दान करेगी. कंपनी ने रिपब्लिकन सीनेट के नेता मिच मैक्कॉनल की सीनेट कमेटी को भी चंदा दिया था. पलोसी के बारे में अफ़वाह का कारण उनके पूर्व चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ नादीम एलशामी का अब डोमिनियन में काम करना है. लेकिन कंपनी ने पहले भी अतीत में रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े लोगों को नौकरी दी है.
डोमिनियन के साथ मिलीभगत के आरोप बाइडन की ट्रांज़िशन टीम तक भी पहुंच गए हैं.
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के मुताबिक़ बाइडन की टीम के वॉलंटियर पीटर नेफेंगर डोमिनियन की सहायक कंपनी स्मार्टमेटिक के चेयरमैन हैं.
पीटर नेफेंगर स्मार्टमेटिक के चेयरमैन हैं लेकिन ये कंपनी डोमिनियन की प्रतिद्वंद्वी है ना कि सहायक. ट्रंप: “इन मशीनों को टेक्सास और दूसरे राज्यों ने इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था क्योंकि ये सुरक्षित नहीं थी”
ये सच है कि टेक्सास ने मशीनों को सर्टिफाई नहीं किया. उनका तरीका दूसरे राज्यों से अलग है. अमरीका की केंद्र सरकार वोटिंग मशीनों को सर्टिफाई करने के लिए दिशानिर्देश देती है ताकि पूरे देश में एक ही मानक हो. हालाँकि टेक्सास ने इसके अलावा भी कुछ चीज़ें जोड़ी हैं जिन पर डोमिनियन मशीनें खरी नहीं उतरतीं. उदाहरण के तौर पर हर मतपत्र पर एक ख़ास नंबर होना चाहिए. राइस यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सस के कंप्यूटर साइंटिस्ट डैन वॉलेक वोटिंग मशीन दिशानिर्देशों के सलाहकार हैं. उनका कहना है कि अगर आप इन ख़ास नंबरों की सुविधा नहीं देते हैं तो इससे वोटर की निजता की रक्षा होती है. लेकिन दूसरी तरफ़ आप एक बढ़िया सुरक्षा कदम के साथ समझौता भी कर रहे हैं. कई नियम-क़ायदे हर राज्य में अलग-अलग हैं लेकिन अमेरिकी सरकार की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने वोटिंग मशीनों में भरोसा जताया है.
उसके मुताबिक़, “ऐसा कोई सबूत नहीं है कि किसी वोटिंग सिस्टम में वोट खो गई या डिलीट हो गई, बदल दी गई या किसी भी तरह से उसमें छेड़छाड़ हुई.”

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