COVID-19

त्योहारी सीजन में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा, प्रोटोकाॅल की उड़ रही हैं धज्जियां, सर्वेक्षण में हुआ खुलासा

लोकलसर्किल्स के संस्थापक सचिन तपारिया ने कहा, मास्क लगाने की सलाह पर अमल 29 फीसदी से गिरकर 13 फीसदी रह गया, जबकि सामाजिक दूरी का अनुपालन 11 फीसदी से घटकर छह फीसदी रह गया

त्योहारी सीजन में कोरोना वायरस का प्रसार ना बढ़े इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार लोगों से यह अपील कर रहा है कि वे कोरोना प्रोटोकाॅल का पालन करें, ताकि वायरस को अपना प्रसार करने में मदद ना मिले. बावजूद इसके डिजिटल कम्युनिटी आधारित प्लेटफॉर्म ‘लोकलसर्किल्स’ द्वारा किये गये सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है कि त्योहारी सीजन में कोरोना प्रोटोकाॅल का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है.
पीटीआई न्यूज के अनुसार लोकलसर्किल्स के संस्थापक सचिन तपारिया ने कहा, मास्क लगाने की सलाह पर अमल 29 फीसदी से गिरकर 13 फीसदी रह गया, जबकि सामाजिक दूरी का अनुपालन 11 फीसदी से घटकर छह फीसदी रह गया, जो यह दर्शाता है कि कोविड के इस महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल पर लोगों ने ध्यान देना छोड़ दिया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि कोविड-19 महामारी अब खत्म हो गयी है.
सर्वेक्षण के अनुसार त्योहारी मौसम की शुरुआत के साथ ही कोविड-19 से बचाव के लिए मास्क लगाने एवं सामाजिक दूरी का पालन करने की हिदायतें निष्प्रभावी होने लगी हैं. सर्वेक्षण में देश के 366 जिलों के 65 हजार लोगों की प्रतिक्रियाएं ली गयीं. उनसे यह पूछा गया था कि उड़ानों/ हवाईअड्डों/ रेलगाड़ियों/ रेलवे स्टेशनों और बसों/ बस अड्डों तथा टीकाकरण केंद्र जैसे स्थानों पर लोग किस हद तक मास्क लगाने एवं सामाजिक दूरी बनाये रखने के कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हैं.
सर्वेक्षण में 64 प्रतिशत पुरुषों एवं 36 प्रतिशत महिलाओं ने हिस्सा लिया जिनमें अपनी प्रतिकिया देने वाले 46 प्रतिशत लोग प्रथम श्रेणी के इलाकों से, 29 प्रतिशत द्वितीय श्रेणी के इलाकों और शेष 25 फीसदी लोग तृतीय श्रेणी और ग्रामीण जिलों के निवासी थे.
इस साल जून में यह सर्वेक्षण किया गया था उस वक्त 29 फीसदी लोगों ने मास्क लगाने और 11 फीसदी ने सामाजिक दूरी के अनुपालन किये जाने का संकेत दिया था. सर्वेक्षण के इस आंकड़े को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस साल छह जुलाई को अपनी ब्रीफिंग में साझा किया था. सचिन तपारिया ने आगाह किया कि देश में त्योहारी मौसम शुरू हो गया है और सामाजिक स्तर पर मिलने-जुलने, शॉपिंग और सामुदायिक कार्यक्रमों के कारण कोविड के मामलों में बढ़ोतरी का खतरा भी बहुत अधिक हो गया है.

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