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स्वास्थ्य समूहों ने भारत की आवश्यक दवाओं की सूची में व्यापक सुधार की मांग की

Health groups demand overhaul of India’s essential medicines list

नई दिल्ली। चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने भारत की राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं सूची (NLEM) में तेजी से सुधार करने की मांग की है। उनके अनुसार, वर्तमान सूची पुरानी हो चुकी है और इसमें आवश्यक दवाओं की कमी है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी आवश्यक दवाओं की सूची में हाल के सुधार किए हैं।

कार्यशील समूह ऑन एक्सेस टू मेडिसिन्स एंड ट्रीटमेंट्स ने बताया कि भारत की NLEM को आखिरी बार 2022 में अधिसूचित किया गया था, जिसमें कुल 384 दवाएं शामिल थीं। जबकि WHO ने अपनी मॉडल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स को 2023 और 2025 में दो बार संशोधित किया है, और अब विश्व स्तर पर आवश्यक दवाओं की संख्या बढ़कर 523 हो चुकी है।

समूह का तर्क है कि मरीजों को गुणवत्ता वाली, किफायती और प्रभावी दवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन यदि सूची पुरानी रहेगी तो इससे जनस्वास्थ्य प्रभावित होगा क्योंकि नई आवश्यक दवाओं को सूची में शामिल न करने से उनका उपयोग सीमित होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि नई दवाओं को शामिल करना आवश्यक है ताकि भारत में न केवल स्वस्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़े, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में नवीनतम तकनीक और दवाओं का लाभ भी आम जनता तक पहुँचे। उदाहरण के लिए, हाल की दवाएं जो विश्वभर में व्यापक रूप से उपयोग की जा रही हैं, उन्हें जल्द से जल्द राष्ट्रीय सूची में शामिल करना चाहिए।

एक स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि ने बताया, “NLEM को नियमित समयांतराल पर संशोधित करना जरुरी है ताकि यह आधुनिक चिकित्सा मानकों के अनुरूप बना रहे। इससे दवाओं की उपलब्धता और उनकी कीमतों पर नियंत्रण रहता है।”

सरकार और संबंधित विभागों से भी आग्रह किया गया है कि वे WHO की मॉडल लिस्ट के अनुरूप आवश्यक दवाओं की सूची को अपडेट करने के लिए समर्पित प्रयास करें। यह न केवल मरीजों के हित में होगा, बल्कि मेडिकल क्षेत्र के विकास में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि आवश्यक दवाओं की सूची का विस्तार और उसमें बदलाव से हम अधिक समावेशी और प्रभावी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की ओर कदम बढ़ा सकते हैं जो हर नागरिक के लिए जीवनरक्षक साबित हो।

अंत में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह आवश्यक है कि सरकार जनता के स्वास्थ्य हितों को प्राथमिकता देते हुए दवाओं की सूची को विश्व स्तर के मानकों के अनुरूप बनाए। ताकि भारत स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल कर सके।

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