ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए मुकाबले में भारत को अपनी गेंदबाजी की भारी कीमत चुकानी पड़ी, जब बिस्नोई द्वारा दो बार बैक-फुट नो-बॉल फैले की गई, जिसके चलते पारी के दौरान 27 और 29 रन के ओवर खेले गए। इन ओवरों ने इंग्लैंड को अच्छी शुरुआत दी और मैच के परिणाम पर बड़ा असर डाला।
इंग्लैंड ने बेथेेल के प्रभावशाली प्रदर्शन के चलते इस मैच में 1-0 की बढ़त बना ली है। बेथेेल की शानदार गेंदबाजी ने भारतीय टीम की रणनीतियों को ध्वस्त कर दिया। दूसरी ओर, बिस्नोई के दो बैक-फुट नो-बॉल और अधिक रन लुटाने के कारण भारत को इस मुकाबले में काफी नुकसान हुआ।
बिस्नोई के नो-बॉल की वजह से न केवल अतिरिक्त रन मिले, बल्कि इंग्लैंड के बल्लेबाजों को भी अतिरिक्त विकेट बचाने का मौका मिला। इससे भारतीय टीम की ओर से विपक्षी बल्लेबाजों को दबाव में लाने की कोशिश अधूरी रह गई।
इंग्लैंड के लिए बेथेेल का यह प्रदर्शन निश्चित ही एक निर्णायक कारक साबित हुआ, जिसने मैच के टर्निंग पॉइंट पर अपनी पकड़ मजबूत की। ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच पर गेंदबाजों के लिए संघर्ष करना सामान्य बात है, लेकिन इस मुकाबले में बिस्नोई की गलतियों ने भारत के लिए मुश्किलें बढ़ा दीं।
यहां तक कि भारतीय कप्तान ने भी बिस्नोई की गेंदबाजी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, और टीम में समायोजन के साथ बेहतर आयोजन का आश्वासन दिया। तेज गेंदबाजों की भूमिका काफी अहम रही, लेकिन ताज़गी और अनुशासन की कमी ने मैदान पर परिणामों को प्रभावित किया।
इस मैच के बाद भारत को सुधार करते हुए, अगले मैचों में रणनीति और गेंदबाजी में मजबूती लानी होगी। ऐसा नहीं किया गया तो इंग्लैंड की टीम इस घरेलू सीरीज में अपनी बढ़त को और मजबूत कर सकती है।
तो ओल्ड ट्रैफर्ड की ये दोनों महंगे ओवर भारतीय टीम के लिए सीख का विषय हैं, जो आने वाले मैचों में बेहतर प्रदर्शन के साथ दिखेगा।














