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सड़क किनारे विक्रेता हुए निर्यातक: मेघालय के ‘संख्याबद्ध’ किसानों को मेहनत का फल

Roadside vendors turned exporters: Meghalaya’s ‘numbered’ farmers reap fruits of labour

मेघालय के री-बोई जिले के जीरांग क्षेत्र में स्थित 433 सदस्यों वाली एक जैविक किसान उत्पादक कंपनी ने सफल कृषि सामूहिकीकरण का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। यह कंपनी न केवल स्थानीय कृषि विकास में एक मिसाल बन गई है, बल्कि किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हुई है।

इस कंपनी ने स्थानीय किसानों को एकजुट कर जैविक खेती को बढ़ावा दिया है, जिससे उनकी उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार हुआ है। इससे न केवल किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि उनके उत्पाद अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं।

जीरांग की इस पहल ने साबित कर दिया है कि सही दिशा और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा सकती है। कंपनी के सदस्यों ने पारंपरिक खेती के जोखिमों को कम करते हुए जैविक खेती के फायदे उठाए हैं, जो पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है।

स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से भी इस पहल की सराहना की गई है, जिन्होंने किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और विपणन सहायता प्रदान कर इस मॉडल को सफल बनाया है। इससे किसानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की कंपनियां न केवल किसानों को संगठित करने में मदद करती हैं, बल्कि वे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण, ब्रांडिंग और निर्यात में भी अहम भूमिका निभाती हैं। जीरांग का यह मॉडल पूरे मेघालय के लिए उदाहरण है, जो अन्य जिलों में भी कृषि सम्बंधित समष्टिगत विकास योजनाओं को प्रोत्साहित कर सकता है।

आगे चलकर, इस तरह की किसान उत्पादक कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, युवा किसानों की भागीदारी को बढ़ावा देने और सतत विकास लक्ष्यों के पूर्णाकरण में भी योगदान देंगी। मेघालय सरकार ने इस पहल को और अधिक बढ़ावा देने की योजना बनाई है ताकि कृषि क्षेत्र को और मजबूत किया जा सके।

इस प्रकार, री-बोई जिले के जीरांग की 433 सदस्यीय जैविक किसान उत्पादक कंपनी सफल सामूहिकीकरण की मिसाल बनकर न केवल किसानों की आर्थिक दशा में सुधार लेकर आई है, बल्कि पूरे राज्य के कृषि विकास के लिए एक नई उम्मीद का संचार किया है।

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