दक्षिण कन्नड़, 27 अप्रैल: दक्षिण कन्नड़ जिला पंचायत प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (ZP CEO) ने क्षेत्र के बैंकों को आवास और गैर-प्राथमिक क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमा राशि तो प्राइवेट बैंकों ने अच्छी मात्रा में इकट्ठा कर ली है, लेकिन ऋण प्रदान करने में काफी कम रुचि दिखाई जा रही है, जो आर्थिक विकास के लिए चिंता का विषय है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, दक्षिण कन्नड़ के ग्रामीण इलाकों से प्राइवेट बैंकें लगभग ₹140 करोड़ की जमा राशि एकत्रित करने में सफल रही हैं, लेकिन उसी इलाके में इन बैंकों द्वारा केवल ₹80 लाख का ही ऋण वितरण किया गया है। यह स्थिति क्षेत्रीय ग्रामीण विकास को गति देने में बाधक साबित हो सकती है।
जिला पंचायत के अधिकारियों ने इन्हीं मुद्दों को उठाते हुए स्थानीय बैंकों से अपेक्षा जताई है कि वे अपने ऋण वितरण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए विशेष प्रयास करें, विशेषकर आवास और गैर-प्राथमिक क्षेत्रों में, जिनका विकास अभी भी पिछड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आवासीय ऋण देने से ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा और लोगों की जीवन-स्तर में सुधार होगा।
इसके अतिरिक्त, गैर-प्राथमिक क्षेत्र जैसे छोटे व्यवसाय, कृषि से जुड़ी गतिविधियों, महिला स्व-सहायता समूह आदि के लिए ऋण देने पर भी जोर दिया गया है क्योंकि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायता मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
जिला प्रशासन ने इस संदर्भ में बैंक अधिकारियों के साथ कई बैठकें आयोजित की हैं और उन्हें निर्देशित किया है कि वे अपनी नीतियों में सुधार कर किसानों, छोटे व्यापारियों और महिलाओं तक ऋण सुविधा पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। सचिवालय के सूत्र बताते हैं कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है तो संभावित उपायों पर विचार किया जाएगा।
क्षेत्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से जमा राशि को वापस उसी क्षेत्र में निवेशित करने का महत्त्वपूर्ण लाभ होता है। इससे क्षेत्रीय विकास होता है और सामाजिक-आर्थिक तौर पर स्थानीय लोगों का सशक्तिकरण संभव होता है। वर्तमान में बैंक जमा राशि के मुकाबले कम ऋण वितरण कर के इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रही हैं।
इस चुनौती का सामना करने के लिए वित्तीय संस्थाओं को अपने आउटरीच कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाना होगा, जिससे आम लोगों को ऋण लेने में सुविधा हो और वे अपने सामाजिक एवं आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि बैंक ऋण मानदंडों में लचीलापन लाएं और ग्रामीण ग्राहकों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाएं।
इस दिशा में जिला प्रशासन के निरंतर प्रयास और बजट योजनाओं का सफल क्रियान्वयन ही जिले के समग्र विकास की कुंजी होगा। सभी हितधारकों की साझेदारी और सक्रिय भूमिका से ही दक्षिण कन्नड़ के ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति में सुधार संभव है।















