Education

केरल विधानसभा ने राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रस्ताव पारित किया, NEET को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं

Kerala Assembly passes resolution seeking reform of national entrance exam system, flags NEET concerns

केरल की विधानसभा में उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं, विशेष रूप से NEET की प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। यह प्रस्ताव परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ी गंभीर चिंताओं को लेकर उठाया गया है।

बैठक के दौरान, मंत्री ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कई खामियों की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रणाली में कई बार छात्रों को उचित योग्यता और मेहनत के बावजूद असफल होना पड़ता है, जो परीक्षा के संचालन में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि इस प्रणाली को सुधारना आवश्यक है ताकि छात्रों का मानवीय पक्ष और उनके कौशल का ठीक से मूल्यांकन हो सके।

विपक्ष सदस्यों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि NEET जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रवेश परीक्षा विवादास्पद होते जा रहे हैं और इनका चलन छात्रों एवं अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में सुधार तथा निर्णायक तंत्र के पुनर्निर्माण से यह समस्या हल हो सकती है।

इस प्रस्ताव में यह भी उल्लेख था कि वर्तमान राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा प्रणाली छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने में असमर्थ है और इसमें सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक असमानताओं को दूर करने के लिए आवश्यक प्रावधानों की कमी है। इस पर चर्चा करते हुए सदस्यों ने कहा कि इस प्रणाली में ऐसे सुधार किए जाएं जो सभी वर्गों के विद्यार्थियों के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी हों।

केरल विधानसभा द्वारा इस प्रस्ताव के पारित होने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय पाठ्यक्रमों में आधुनिक और न्यायसंगत बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है। यह प्रयास छात्रों की शिक्षा संबंधी उम्मीदों को संतुष्ट करने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा के सही आकलन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा।

इस प्रस्ताव की चर्चा और इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगामी सत्रों में होगी, जहाँ अन्य संबंधित मंत्रालयों और आयोगों के साथ समन्वय स्थापित करके राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। इस पूरे मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा समर्थन और सुझाव भी लिए जाने की संभावना है।

समय की मांग है कि शिक्षा प्रणाली ऐसी हो जो प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ कर्मचारियों में नैतिकता, योग्यता तथा गुणवत्ता का समावेश सुनिश्चित करे। केरल का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बनेगा, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्रणाली में सुधार की लहर तेज हो सकती है।

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