नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पहली बार मैट्रोलॉजी नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के लिए नियमों में ढील देने का फैसला किया है। यह बदलाव जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से लागू किया गया है, जो Ease of Doing Business (EoDB) एजेंडा का हिस्सा है। सरकार ने इस बदलाव का उद्देश्य व्यापारिक माहौल को सरल बनाना और नियमों के प्रति व्यापारियों में विश्वास बढ़ाना बताया है।
स्रोतों के अनुसार, अब यदि कोई व्यवसायी या उद्योग पहले बार मैट्रोलॉजी नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे तत्काल दंडित करने की बजाय पहले सुधार करने का मौका दिया जाएगा। केंद्र सरकार का मानना है कि इस तरह की नीति से न केवल नियमों का सम्मान बढ़ेगा बल्कि व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
जन विश्वास अधिनियम, 2026 में किए गए इस संशोधन से संबंधित जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “इस कदम का उद्देश्य व्यापारिक समुदाय को शुरुआत में सजा देने के बजाय सुधार के अवसर प्रदान करना है। इससे व्यापारी नियमों का पालन अधिक सजगता से करेंगे और देश में व्यापार का विकास होगा।”
इस नए प्रावधान के तहत, पहली बार उल्लंघन करने वालों को नोटिस दिया जाएगा और उन्हें सुधार का मौका मिलेगा। सुधार न करने या इसी प्रकार की गलती दोबारा करने पर ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे गैर-जानबूझ कर हुई गलतियों को सुधारने का मार्ग प्रशस्त होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन भारत के Ease of Doing Business इंडेक्स में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे न केवल विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा बल्कि घरेलू कारोबार भी सुगमता से बढ़ सकेगा। साथ ही, यह व्यापारियों को नियमों के प्रति जागरूक करने में सहायक होगा और व्यापक स्तर पर व्यापारिक वातावरण में सुधार लाएगा।
सरकार ने बताया है कि मैट्रोलॉजी विभाग द्वारा जारी मानकों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए भी कई अन्य कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे उद्योगों को तकनीकी मानकों के अनुपालन में आसानी होगी। इससे व्यापार की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
इस संशोधन के बाद व्यापारी समुदाय ने राहत की सांस ली है, क्योंकि अक्सर पहली बार हुई त्रुटियों के कारण सख्त दंडों का सामना करना पड़ता था। अब सुधार के अवसर मिलने से वे बेहतर तरीके से नियमों का पालन कर सकेंगे।
कुल मिलाकर यह बदलाव भारत सरकार की व्यापार सुगमता बढ़ाने और नियम-कानूनों में पारदर्शिता लाने की नीति का हिस्सा है। इससे देश में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
















