दुनिया भर की 100 से अधिक वैश्विक कंपनियां, जिनमें नेस्ले और उबर जैसे बड़े नाम शामिल हैं, सरकारों से आर्थिक रणनीतियों में तेज़ इलेक्ट्रिफिकेशन को प्राथमिकता देने का आग्रह कर रही हैं। इन कंपनियों ने कहा है कि इस बदलाव से जीवाश्म ईंधन की अस्थिर कीमतों पर निर्भरता कम होगी, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में भी सुधार होगा।
इन संगठनों का संयुक्त वार्षिक राजस्व 1.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। उन्होंने जोर दिया है कि इस संक्रमण को तेज़ करने के लिए सरकारों द्वारा स्पष्ट नीतियां बनाना और परमिट प्रक्रिया को सरल और शीघ्र करना बेहद आवश्यक है। ऐसा करने से न केवल ऊर्जा की मांग कम होगी बल्कि उपभोग में पारदर्शिता और स्थिरता भी आएगी।
इतने बड़े आर्थिक प्रभाव वाली कंपनियां मानती हैं कि वर्तमान आर्थिक ढांचे में इलेक्ट्रिफिकेशन को प्राथमिकता न देना दीर्घकालिक नुक़सान पहुंचा सकता है। जीवाश्म ईंधनों की बढ़ती कीमतें एवं इनके स्रोतों की अस्थिरता ने ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को चुनौती दी है। इसलिए, स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा की ओर बढ़ने से देश अपनी ऊर्जा निर्भरता कम कर सकते हैं।
इसके अलावा, इलेक्ट्रिफिकेशन से पर्यावरणीय लाभ भी होंगे। कम कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों के विकास के लिए नई तकनीकें सामने आएंगी जो रोजगार सृजन में भी मदद करेंगी। व्यवसायिक नेताओं ने उद्देश्यों की पूर्ति हेतु संयुक्त रूप से सरकारों से सहयोग और तत्परता की मांग की है।
इन कंपनियों की यह पहल वैश्विक आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकारें आवश्यक कदम समय पर उठाएं तो इलेक्ट्रिफिकेशन की इस लहर से देश ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।













