लखनऊ: सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में लखनऊ के छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने लेखपाल परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े के मद्देनजर उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए स्थायी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने की मांग की है।
प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दिपके ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में बढ़ती गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि न्याय और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभाव से सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी है। “हम चाहते हैं कि हर अभ्यर्थी को न्याय मिले, और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,” उन्होंने जोर दिया।
प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने विभिन्न तरह की परेशानियों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि न केवल परीक्षाओं में अनियमितताएं होती हैं, बल्कि अभ्यर्थियों की शिकायतों को सुनने का कोई स्थायी तंत्र भी नहीं है। इसके कारण वे न्याय पाने के लिए भटक जाते हैं। छात्र प्रतिनिधि ने कहा, “हम चाहते हैं कि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक स्वतंत्र और स्वायत्त शिकायत निवारण प्रणाली हो, जिससे हमारी समस्या का समाधान शीघ्रता से किया जा सके।”
उन्होंने प्रशासन और सरकार से अपील की कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन करें। इस कमेटी को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए ताकि वह स्थिति की तह तक जाकर दोषियों को दंडित कर सके। साथ ही, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि देश के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पारदर्शिता आवश्यक है। प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी से न केवल प्रतिभा दबती है, बल्कि समाज में न्याय व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह लगते हैं। इसीलिए छात्रों का यह आंदोलन सांकेतिक स्वरूप में ही सही, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस प्रदर्शन ने लखनऊ में शिक्षा और रोजगार के प्रति युवाओं की बढ़ती चिंता को भी उजागर किया है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और संबंधित विभाग इन मांगों को किस तरह स्वीकारते हैं और इस मुद्दे का त्वरित और सकारात्मक समाधान निकालते हैं।
















