17 सितंबर को समाज सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी का जन्मदिवस मनाया जाता है, जो तमिलनाडु एवं पूरे भारत में सामाजिक न्याय, समानता और सुधार के प्रतीक माने जाते हैं। इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनका उद्देश्य उनके विचारों और आदर्शों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना है।
पेरियार ने जाति व्यवस्था, भेदभाव और अज्ञानता के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में महिलाओं के अधिकारों, प्राकृतिक संपदा की समानता और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से दक्षिण भारत में सामाजिक बदलाव की एक नई लहर शुरू हुई।
प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को उनके जन्मदिवस पर राज्य सरकार समेत अनेक संगठनों द्वारा यादगार समारोह आयोजित किए जाते हैं। इस दिन स्कूलों में विशेष व्याख्यान, नाटक और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन होता है ताकि छात्रों को उनके सामाजिक दर्शन के प्रति जागरूक किया जा सके।
विशेष रूप से तमिलनाडु सरकार इस दिन को सार्वजनिक अवकाश के रूप में घोषित करती है, ताकि लोग पेरियार के सामाजिक सिद्धांतों को समझें और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
पेरियार ई.वी. रामासामी का योगदान न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि समग्र भारतीय समाज के लिए प्रेरणास्पद है। उनके जीवन और कार्य हमें सामाजिक समानता, शिक्षा के महत्व और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता सिखाते हैं। इसलिए 17 सितंबर का दिन केवल एक जन्मदिन नहीं बल्कि एक सामाजिक चेतना का पर्व भी है।














