Chhattisgarh State

वंचित समूहों को मुख्य धारा में लाने की सार्थक पहल

रायपुर,17 दिसम्बर 2019/ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में आदिवासियों की उन्नति और बेहतरी के लिए कई अभिनव योजना बनाकर सार्थक पहल की जा रही है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर ढ़ाई हजार रूपए से बढ़ाकर चार हजार रूपए प्रति मानक बोरा कर दी गई है। यह दर देश में सबसे अधिक है। राज्य में जहां पहले 15 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही थी। वहीं नई सरकार ने इसमें 7 और नए लघु वनोपज को जोड़ते हुए अब 22 लघु वनोपजों की खरीदी का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने आदिवासियों के हित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं, जिनमें वन अधिकार अधिनियम 2006 के सुचारू संचालन के लिए प्रशिक्षण, कार्यशाला आयोजित कर अस्वीकृृत किए गए प्रकरणों की समीक्षा कर निराकरण किया जा रहा है। अबूझमाड़ क्षेत्र के विशेष रूप से कमजोर जनजाति अबुझमाड़िया को वन अधिकार पत्र प्रदान करने की विशेष पहल की जा रही है। इसी तरह बच्चे के जन्म लेने के उपरांत पिता की जाति के आधार पर उसे जाति प्रमाण पत्र तत्काल प्रदान करने का निर्णय भी सरकार का उल्लेखनीय कदम है।
राज्य सरकार द्वारा वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए कई निर्णय लिए गए हैं। वनवासियों को वन अधिकार कानून का लाभ दिलाने के लिए वन अधिकार मान्यता पत्र की समीक्षा, वन क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई सुविधा के लिए नदी, नालों के पुनर्जीवन के कार्यो को प्राथमिकता दी जा रही है। इन अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हाट बाजारों में मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना और महिलाओं और बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए गर्म पौष्टिक भोजन देने मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान शुरू की गई हैं। इन योजनाओं की सफलता को देखते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती पर इस योजना को पूरे प्रदेश में लागू किया गया।
मुख्यमंत्री श्री बघेल द्वारा आदिवासी समाज के हित में विश्व आदिवासी दिवस पर सामान्य अवकाश घोषित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बस्तर और सरगुजा में कनिष्ठ कर्मचारी का चयन बोर्ड का गठन करने की घोषणा से स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता मिलेगी। पांचवीं अनुसूची के जिलों में बस्तर, सरगुजा संभाग और कोरबा जिले में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय लोगों की भर्ती के लिए आयु सीमा में तीन वर्षीय छुट का प्रावधान किया गया है। एनएमडीसी के नगरनार प्लांट में ग्रुप सी और ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा दंतेवाड़ा में कराने के लिए राज्य सरकार की पहल पर एनएमडीसी द्वारा सहमति दी गई है। मुख्यमंत्री ने नक्सल पीड़ित युवा बेरोजगारों को डीएमएफ मद से बी.एड. की डिग्री पूर्ण होने पर रोजगार प्रदान करने और भोपालपट्टनम में बांस आधारित कारखाना स्थापित करने की घोषणा की है। आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए नेशनल डांस फेस्टिवल राजधानी रायपुर में 27, 28 और 29 दिसम्बर को आयोजित किया जाएगा। इसी प्रकार नक्सल प्रभावित क्षेत्र अबूझमाड़ अंतर्गत बस्तर संभाग जिला नारायणपुर और बीजापुर तथा दंतेवाड़ा के लगभग 275 से अधिक असर्वेक्षित ग्रामों में वर्षो से निवासरत 50 हजार से अधिक लोगों को उनके कब्जे में धारित भूमि का मसाहती खसरा और नक्शा उपलब्ध कराया जाएगा। इस निर्णय से किसान परिवार के पास उनके कब्जे की भूमि का शासकीय अभिलेख उपलब्ध हो सकेगा और वे अपने काबिज भूमि का अंतरण कर सकेंगे। इससे अबूझमाड़ क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 10 हजार किसानों को 50 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि का स्वामित्व प्राप्त होगा। राज्य सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि डीएमएफ राशि का उपयोग खदान प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन में बेहतर परिवर्तन लाने के लिए किया जाएगा। आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण दूर करने के लिए चना वितरित किया जा रहा है, यहां गुड़ भी दिया जाएगा। बस्तर संभाग में कुपोषण दूर करने के लिए बच्चों और महिलाओं को विशेष कुपोषण आहार के वितरण का काम प्रारंभ हो चुका है। राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना नीति आयोग ने भी की है। इसी तरह सुकमा जिले के घोर नक्सल प्रभावित जगरगुंड़ा क्षेत्र के 14 गांवों की एक पूरी पीढ़ी 13 वर्षो से शिक्षा से वंचित थी, अब यहां स्कूल भवनों का पुनर्निमाण कर दिया गया है। साथ ही कक्षा पहली से 12वीं तक के बच्चों को प्रवेश दिलाकर उनकी शिक्षा प्रारंभ की गई है। यहां 330 बच्चों को निःशुल्क आवासीय सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। इसी प्रकार बस्तर अंचल के बीजापुर जिले में लंबे समय से बंद पड़े 26 स्कूल फिर से गुलजार हुए हैं। इनमें बीजापुर और भैरमगढ़ के पांच-पांच, उसूर के छह और भोपालपट्टनम के दस स्कूलों में लंबे अरसे बाद फिर से पढ़ाई -लिखाई शुरू हुई है। इस तरह इन क्षेत्रों में शिक्षा की ज्योति फिर से एक बार प्रज्जवलित हो उठी है।
मुख्यमंत्री श्री बघेल की सरकार ने आदिवासी विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष स्थानीय विधायक को बनाने का फैसला लिया है। बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र विकास प्राधिकरण तथा सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र को समाप्त करते हुए अब तीन प्राधिकरण बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण और मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण का गठन कर आदिवासियों को अधिकार सम्पन्न बनाया गया है। प्रत्येक प्राधिकरण में क्षेत्रीय अनुसूचित जनजाति विधायकों में से एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। पहले इन प्राधिकरणों के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते थे, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण में अब स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल जैसे कार्यो तथा अन्य प्राथमिकता के 11 प्रकार के कार्यो को स्वीकृत किया जाएगा। यह कार्य अब बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण और मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अंतर्गत भी किए जाएंगे। सरकार ने निर्णय लिया है कि नक्सल प्रभावित अंचलों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के रहवासियों के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी। अपराधिक प्रकरणों से प्रभावित आदिवासियों को राहत और प्रकरण वापसी के लिए सेवा निवृत्त न्यायाधीश के अध्यक्षता में समिति गठित की गई है।
श्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों अंचलों में नई पहल करते हुए इन्द्रावती नदी विकास प्राधिकरण के गठन, बस्तर में आदिवासी संग्रहालय की स्थापना की घोषणा की है। सरकार ने बस्तर संभाग के सभी जिलों में पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रावास खोलने की घोषणा के साथ ही कांकेर में पिछड़ा वर्ग कन्या पोस्ट मैट्रिक छात्रावास के लिए 2 करोड़ 88 लाख रूपए स्वीकृत किए गए हैं। मिनी माता की स्मृति में छत्तीसगढ़ में 11 कन्या छात्रावासों के लिए बजट में स्वीकृति दी जाएगी। प्रदेश के अनुसूचित जाति, जनजाति बालिका छात्रावास में सुरक्षा अमला और बाउड्रीवॉल बनाने की घोषणा भी की गई है। सरकार ने निर्णय लिया है कि विशेष जनजाति के लोगों के लिए सामाजिक भवनों का निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में रोजगार की व्यवस्था करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग के माध्यम से संचालित निर्माण कार्यो के द्वारा भी स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के प्रयास हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में लघु वनोपज पर आधारित लघु उद्योगों और प्रसंस्करण इकाईयों को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे यहां नागरिकों को रोजगार और आय अर्जन के अवसर मिल सकेंगे। श्री बघेल ने इन क्षेत्रों में लघु वनोपज पर आधारित प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री से वन अधिनियम के प्रावधानों को शिथिल करने का आग्रह किया है, जिससे यहां रोजगार मूलक इकाईयों के लिए जमीन आबंटित करने के लिए सुविधा मिलेगी।
प्रदेश में प्रयास आवासीय विद्यालयों में अध्ययरत नक्सल प्रभावित क्षेत्र के विद्यार्थी उत्कृष्ठ इंजीनियरिंग, चिकित्सा और अन्य शैक्षणिक संस्थानों बड़ी संख्या में प्रवेश प्राप्त करने में सफल हो रहे हैं। वर्ष 2019-20 में अन्य वर्षो की तुलना में सर्वाधिक 66 छात्र-छात्राएं आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और सात मेडिकल में प्रवेश के लिए अर्हता प्राप्त किए हैं। राज्य सरकार द्वारा प्री मैट्रिक छात्रावास और आवासीय विद्यालयों से आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति दर में वृद्धि कर एक हजार रूपए प्रतिमाह कर दिया है। मैट्रिकोत्तर छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को दिए जाने वाले छात्र भोजन सहाय की राशि बढ़ाकर 700 रूपए प्रतिमाह की गई हैं। वर्ष 2019-20 में 16 नवीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं, इनके लिए नवीन भवन भी स्वीकृत किए गए हैं।

लेख : ललित चतुर्वेदी

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