नई दिल्ली: भारत सरकार ने मालदीव में खसरे के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए वहां 20,000 खसरे के टीके और लगभग 3 टन चिकित्सा सामग्री भेजी है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को सार्वजनिक की। इस सहायता का उद्देश्य मालदीव के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करना और इस संक्रामक बीमारी के प्रसार को रोकना है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और मालदीव के बीच परस्पर सहयोग की लंबी परंपरा रही है, खासकर स्वास्थ्य क्षेत्र में। कोरोना महामारी के बाद से ही भारत ने स्वास्थ्य सहयोग को और भी मजबूती दी है, ऐसे में इस कदम को दोनों देशों के परिचालन और सामरिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
मालदीव में खसरे के अचानक मामलों में वृद्धि ने वहां की स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ा दिया है। भारत की तरफ से भेजी गई यह सहायता तत्काल राहत प्रदान करने के प्रयास का हिस्सा है। टीकों के अलावा, भेजी गई चिकित्सा सामग्री में प्राथमिक उपचार के लिए आवश्यक उपकरण और दवाइयां शामिल हैं, जो अस्पतालों और क्लीनिकों में इस्तेमाल की जाएंगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि खसरा एक गंभीर वायरल संक्रामक रोग है, जो खासतौर पर बच्चों के लिए घातक हो सकता है। इसलिए इसके जल्द नियंत्रण के लिए टीकाकरण अनिवार्य है। भारत की यह पहल न केवल मालदीव के लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूत करती है।
विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत अन्य मात्रा में भी स्वास्थ्य सहयोग की योजना बना रहा है, ताकि कोरोना और अन्य संक्रामक रोगों से निपटने के लिए मालदीव की तैयारी मजबूत हो सके। दोनों देशों के बीच यह समर्थन स्वास्थ्य क्षेत्र में गहरे रिश्ते और साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मालदीव सरकार ने भी इस मानवीय मदद के लिए भारत को धन्यवाद दिया है और आशा व्यक्त की है कि इससे उनके देश में खसरे के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
इस सहायता के अलावा, भारत नियमित रूप से क्षेत्रीय स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए अपनी सहायता जारी रखता है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में। यह कदम भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के मंत्रणा को प्रतिबिंबित करता है, जो वैश्विक और क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।















