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टाटा स्टील का कहना है कि यूके प्लांट के कम उत्सर्जन परियोजना में बिजली पहुंच सुरक्षित करने में देरी

Tata Steel says U.K. plant’s low-emission project facing delays in securing electricity access

टाटा स्टील के यूके प्लांट की लो-इमिशन परियोजना में बिजली कनेक्टिविटी के जटिल मुद्दे, देरी की आशंका

कोलकाता: भारतीय प्रमुख स्टील निर्माता टाटा स्टील ने कहा है कि उसके यूके में स्थित प्लांट की कम उत्सर्जन वाली परियोजना को बिजली पहुंचाने की प्रक्रिया में देरी हो रही है। कंपनी के कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी कौशिक चटर्जी ने बताया कि नई विद्युत संरचना के लिए एनर्जी सिस्टम ऑपरेटर (ESO) और नेशनल ग्रिड के साथ काम चल रहा है, लेकिन नेशनल ग्रिड ने आधिकारिक रूप से कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट में देरी की सूचना दी है।

टाटा स्टील की यह परियोजना पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है, ताकि उत्पादन प्रक्रिया में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम किया जा सके। इस परियोजना का उद्देश्य यूके में कंपनी की उत्पादन इकाइयों को स्वच्छ और किफायती ऊर्जा स्रोतों से जोड़ना है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिचालन लागत में भी कमी आएगी।

कौशिक चटर्जी ने कहा, ‘हम नीति विभागों और नेशनल ग्रिड के सहयोग से इस नए इलेक्ट्रिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन नेशनल ग्रिड ने हमें आधिकारिक रूप से सूचित किया है कि बिजली कनेक्टिविटी चरण में देरी आ सकती है। यह हमारे परियोजना के क्रियान्वयन को प्रभावित कर सकता है।’

विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकार की बिजली कनेक्टिविटी की देरी न केवल परियोजना की समयसीमा को बाधित कर सकती है बल्कि इससे निवेश की लागत भी बढ़ सकती है। यूरोप में वर्तमान में ऊर्जा अवसंरचना का आधुनिकीकरण चल रहा है, जिसमें चुनौतियों का सामना करना आम बात है।

टाटा स्टील की लो-इमिशन परियोजना यूके के पर्यावरणीय मानदंडों के अनुरूप है और यूरोपियन ग्रीन डील के लक्ष्यों को भी समर्थन देती है। कंपनी ने कहा है कि वह इस बाधा को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ परामर्श जारी रखेगी ताकि परियोजना को समय पर पूरा किया जा सके।

इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन से टाटा स्टील को न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी मिलेगी बल्कि यह कंपनी को विश्वव्यापी स्थायी उत्पादन प्रथाओं के लिए एक नया मानदंड स्थापित करने में मदद करेगा। ऐसे समय में जब विश्व भर की कंपनियां पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तेज कदम उठा रही हैं, टाटा स्टील की यह पहल सराहनीय मानी जा रही है।

अंततः, टाटा स्टील की इस परियोजना से जुड़े देरी के बावजूद कंपनी ने उम्मीद जताई है कि सहयोगी संस्थाओं के लगातार प्रयास से यह समस्या शीघ्र हल हो जाएगी और कंपनी अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल कर सकेगी।

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