नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में संकट के भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा की गई तथा उनसे निपटने के लिए दीर्घकालिक और अल्पकालिक रणनीतियों पर चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार परिषद के सदस्यों ने प्रधानमंत्री के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें तेल और गैस की आपूर्ति, वैश्विक व्यापार, विदेशी निवेश और मुद्रा बाजार पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों पर संकट के प्रभावों का अलग-अलग अध्ययन कर आवश्यक नीतिगत कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया। बैठक में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और उद्योगों के लिए कारोबारी माहौल बेहतर करने पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा और एथेनॉल जैसे वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई।
बैठक के दौरान इस बात पर भी सहमति बनी कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि और निवेश माहौल को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार सुधारों की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए।

















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