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केरल के कोझिकोड MCH में चिकित्सा लापरवाही की शिकार हर्षिना को उसी अस्पताल में मिली नौकरी

Harshina, victim of ‘medical negligence’ at Kerala’s Kozhikode MCH, gets job in same hospital

कोझिकोड: केरल के कोझिकोड स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (MCH) की एक मरीज, के.के. हर्षिना, जो कथित तौर पर एक असफल शल्य चिकित्सा की शिकार बनी थीं, को उसी अस्पताल में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति अस्पताल की चिकित्सा सेवा प्रणाली में सुधार और मरीजों के साथ सहानुभूति बढ़ाने की पहल के रूप में देखी जा रही है।

हर्षिना पर कुछ साल पहले एक ऑपरेशन के दौरान लापरवाही का आरोप लगाया गया था, जिसके कारण उन्हें गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस मामले ने चिकित्सा व्यवस्था और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए थे।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने हर्षिना की स्थिति को देखते हुए उनके लिए एक उचित पद उपलब्ध कराया है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के अंदर काम करने का अवसर मिलेगा। यह नियुक्ति न केवल उनकी आर्थिक स्थिरता बढ़ाने में मददगार साबित होगी, बल्कि चिकित्सा कर्मचारियों और मरीजों के बीच बेहतर समझ और संवाद के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

हर्षिना ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मुझे अस्पताल की तरफ से यह अवसर मिलना बहुत राहत देने वाला है। मैंने जो कुछ भी सहा, उससे मैं कभी पीछे नहीं हटूंगी और अब मैं यहां काम कर के दूसरों की मदद करना चाहती हूं।”

डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पहल का समर्थन किया है। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, “इस नियुक्ति के जरिये हम मेडिकल सिस्टम में सुधार के लिए एक नया कदम उठा रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इससे मरीजों और अस्पताल के बीच विश्वास बढ़ेगा।”

यह मामला चिकित्सा लापरवाही के खिलाफ उठाए गए कदमों और अस्पतालों में मानवता पर आधारित दृष्टिकोण को फिर से मजबूती प्रदान करता है। केरल के स्वास्थ्य विभाग ने भी इस नियुक्ति पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है और कहा कि वे ऐसी पहलों को प्रोत्साहित करेंगे जो मरीज केंद्रित हों।

इस घटना ने चिकित्सा सेवा क्षेत्र में सुधार और मरीज के अधिकारों की सुरक्षा की आवश्यकता को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अस्पतालों को चाहिए कि वे अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनें ताकि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से बचा जा सके।

अंत में, हर्षिना की नियुक्ति एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है, जहां न सिर्फ अस्पताल प्रशासन ने गलतियों को स्वीकार किया है, बल्कि पीड़ित को समर्थन देकर एक नई शुरुआत का अवसर दिया है। यह कदम केरल के स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

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