West Bengal की फलता विधानसभा सीट से All India Trinamool Congress उम्मीदवार जहांगीर खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मतदाताओं को कथित रूप से डराने-धमकाने और चुनावी हिंसा से जुड़े मामलों में मंगलवार को Calcutta High Court में अहम सुनवाई होने जा रही है।
यह मामला जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। इससे पहले अदालत ने जहांगीर खान को 24 मई तक गिरफ्तारी और किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी। अब अदालत यह तय करेगी कि उन्हें आगे भी राहत मिलेगी या नहीं।
जहांगीर खान के खिलाफ 29 अप्रैल को हुए मतदान से पहले और मतदान के दिन कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। आरोप है कि उन्होंने मतदाताओं को धमकाने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की थी। गिरफ्तारी की आशंका के बीच खान ने 18 मई को अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने उन्हें अस्थायी राहत देते हुए पुलिस को कठोर कार्रवाई से रोक दिया था और अगली सुनवाई 26 मई तय की थी। अब इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों नजरें टिकी हुई हैं।
इसी बीच 21 मई को हुए पुनर्मतदान से पहले जहांगीर खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनावी मैदान से हटने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वह नए मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari द्वारा फलता क्षेत्र के लिए घोषित विकास पैकेज के समर्थन में यह फैसला ले रहे हैं।
हालांकि उनका यह फैसला केवल प्रतीकात्मक साबित हुआ, क्योंकि पुनर्मतदान के दौरान उनका नाम ईवीएम में बना रहा और वे आधिकारिक उम्मीदवार रहे।
24 मई को घोषित नतीजों में Bharatiya Janata Party उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की। Communist Party of India (Marxist) उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी दूसरे स्थान पर रहे, जबकि जहांगीर खान चौथे नंबर पर पहुंच गए।
जहांगीर खान को केवल 7,783 वोट मिले और उनकी जमानत भी जब्त हो गई। अब हाईकोर्ट की सुनवाई उनके राजनीतिक भविष्य और कानूनी स्थिति दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।















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