Chhattisgarh

नान घोटाला : डॉ आलोक शुक्ला को हाईकोर्ट से मिली ज़मानत

नान घोटाले मामले में अभियुक्त बनाए गए आईएएस अलोक शुक्ला को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. जस्टिस अरविंद चंदेल की बेंच ने सुनवाई करते हुए अग्रिम जमानत दे दी है. बता दें कि एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने 12 फरवरी 2015 को नागरिक आपूर्ति निगम के 28 ठिकानों में छापा मारकर करोड़ों रूपए बरामद किए थे. इस मामले में 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. आईएएस अधिकारी डा.आलोक शुक्ला और नान के तत्कालीन एमडी अनिल टुटेजा के खिलाफ अभियोजन चलान के लिए राज्य सरकार ने केंद्र को चिट्ठी लिखी थी. 4 जुलाई 2016 को केंद्र ने अभियोजन की अनुमति दे दी थी, बावजूद इसके राज्य शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी. ऐन चुनाव के पहले करीब ढाई साल बीतने के बाद राज्य सरकार ने पूरक चालान पेश करते हुए दोनों ही आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल किए थे.
डा.आलोक शुक्ला के वकील पीयूष भाटिया से हुई बातचीत में कहा कि अग्रिम जमानत याचिका लगाते हुए हमने कोर्ट से कहा था कि एफआईआर में नाम दर्ज नहीं है. 5 दिसंबर 2018 को पूरक चालान पेश कर नाम जोड़ा गया, इससे ना तो पुलिस ने गिरफ्तार किया और ना ही किसी तरह से पूछताछ के लिए बुलाया. 30 महीने बाद एफआईआर दर्ज किया गया. तमाम पहलूओं को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी.
इससे पहले डा.आलोक शुक्ला ने विशेष न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होनें कई महत्वपूर्ण बिंदूओं के आधार पर न्यायालय से अग्रिम जमानत देने की गुहार लगाई थी.डा.आलोक शुक्ला ने अपनी याचिका में कहा था कि यह जीरो रिकवरी का केस था.अपने आवेदन में उन्होंने कहा था कि ना तो किसी से रिश्वत की मांग की और ना ही उनके खिलाफ किसी ने शिकायत की है और ना ही उन्हें रंगे हाथों पकड़ा ही गया है. इतना ही नहीं नान के एमडी पद पर 8 महीने के उनके कार्यकाल के दौरान राज्य शासन को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ. डा.आलोक शुक्ला ने याचिका में इस बात का भी जिक्र किया था कि ऑडिट से भी यह साबित हुआ है कि नागरिक आपूर्ति निगम को उस दौरान 3 करोड़ रुपये का फायदा भी हुआ था. उन्होनें याचिका में इस बात का भी जिक्र किया था कि उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में कहीं भी घटिया स्तर के चावल सप्लाई का मामला सामने नहीं आया, बल्कि उस समय भी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के पीडीएस सिस्टम की सराहना होती रही है और राज्य शासन को इसके लिये राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा गया.
डा.आलोक शुक्ला के अधिवक्ता पीयूष भाटिया ने न्यायालय के समक्ष विधानसभा में नान घोटाले के संबंध में पूछे गये प्रश्नों और इस संबंध में शासन द्वारा दिये गये जवाब को भी रखा और कहा था कि शासन द्वारा दिये गये जवाब में भी किसी तरह का भ्रष्टाचार प्रमाणित नहीं होता. अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष यह तर्क भी रखा था कि मामले में कुल 212 गवाह बनाये गये हैं, जिनमें से अब तक 55 गवाहों के कथन लिये जा चुके हैं,लेकिन इनमें से एक ने भी एसीबी की थ्योरी को सपोर्ट नहीं किया है. इन तमाम तर्कों के आधार पर डा.आलोक शुक्ला को अग्रिम जमानत देने का आग्रह किया गया,लेकिन न्यायालय ने नान घोटाले को गंभीर प्रकृति का मामला बताते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया था.

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