मुंबई, महाराष्ट्र
भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसे गीत बने, जो समय के साथ और भी लोकप्रिय होते चले गए। इन्हीं कालजयी गीतों में एक नाम वर्ष 1980 में रिलीज हुई फिल्म ‘द बर्निंग ट्रेन’ के मशहूर गीत “मेरी नसीब में तू है कि नहीं” का भी शामिल है। महान गायिका लता मंगेशकर की मधुर आवाज में रिकॉर्ड किया गया यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बना हुआ है और 45 वर्षों बाद भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है।
फिल्म द बर्निंग ट्रेन में अभिनेत्री हेमा मालिनी पर फिल्माया गया यह गीत प्यार, उम्मीद और भावनाओं की गहराई को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत करता है। गीत के बोल ऐसे हैं, जो प्रेम की अहमियत का एहसास कराते हैं। यही वजह है कि यह गाना आज भी पुराने फिल्मी गीतों के शौकीनों की प्लेलिस्ट में अपनी खास जगह बनाए हुए है।
इस सदाबहार गीत को लता मंगेशकर ने अपनी भावपूर्ण गायकी से अमर बना दिया। उनकी आवाज में मौजूद भावनात्मक गहराई श्रोताओं को सीधे दिल से जोड़ती है। गीत का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी आर.डी. बर्मन ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखे थे। संगीत, शब्द और गायकी का यह अनूठा मेल आज भी लोगों को भावुक कर देता है।
फिल्म द बर्निंग ट्रेन अपने समय की चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है। इसमें धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, जितेंद्र, हेमा मालिनी, नीतू सिंह, परवीन बाबी और विनोद मेहरा जैसे कई बड़े सितारे नजर आए थे। मल्टीस्टारर होने के बावजूद फिल्म के गीतों ने अलग पहचान बनाई और आज भी रेडियो, म्यूजिक चैनलों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अक्सर सुनाई देते हैं।
संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि लता मंगेशकर के कई गीत समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और नई पीढ़ी भी उन्हें उतना ही पसंद करती है जितना पुराने दौर के श्रोता। “मेरी नसीब में तू है कि नहीं” भी उन्हीं चुनिंदा गीतों में शामिल है, जो बदलते दौर में भी अपनी मिठास और भावनात्मक प्रभाव बनाए हुए हैं।
आज, रिलीज के 45 साल बाद भी यह गीत केवल एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और भावनाओं की अभिव्यक्ति का प्रतीक माना जाता है। लता मंगेशकर की अमर आवाज और हेमा मालिनी की प्रभावशाली अदाकारी ने इस गीत को हिंदी सिनेमा की सदाबहार धरोहरों में शामिल कर दिया है।















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