नई दिल्ली: कांग्रेस नेता जयाराम रमेश ने हाल ही में पारित VB G RAM G अधिनियम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “रोजगार अधिकार चोरी” और एक केंद्रीकृत योजना करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह नया कानून संविधान में निहित कार्य का अधिकार समाप्त कर देता है और इसके कारण राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ आएगा।
जयाराम रमेश ने अपनी बात में कहा कि यह अधिनियम मूल रूप से एक पॉलिसी बदलाव है जो केंद्र सरकार को ग्रामीण रोजगार योजना पर पूर्ण नियंत्रण देता है, जिससे राज्यों की स्वायत्तता सीमित हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस नए कानून के तहत, केंद्र सरकार ही यह तय करेगी कि किसे रोजगार मिलेगा और कितने रोजगार मिलेंगे, जबकि पहले यह अधिकार राज्यों के पास था।
इसके अलावा, कांग्रेस ने केंद्र सरकार से इस योजना को तुरंत रद्द करने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि यह योजना ग्रामीण इलाकों के लोगों के अधिकारों का हनन करती है और उनकी आजीविका को खतरे में डालती है। उन्होंने कहा कि इस कानून के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी पर सवाल उठ जाते हैं और लोगों को बिना किसी निश्चितता के रोजगार पर निर्भर रहना होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस कानून के आने से राज्यों और केंद्र के बीच शक्तियों के बँटवारे में असंतुलन पैदा होगा। साथ ही, राज्यों को इस योजना के लिए धनराशि जुटाने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, जो अंततः ग्रामीण जनसंख्या को प्रभावित कर सकता है।
कई राज्यों ने भी इस अधिनियम के विरोध में आवाज उठाई है और इसे वापस लेने की मांग की है। कहा जा रहा है कि यदि इस कानून को तत्काल प्रभाव से वापस नहीं लिया गया तो ग्रामीण रोजगार क्षेत्र में एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है।
कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया इस बात को उजागर करती है कि ग्रामीण रोजगार को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गहरा मतभेद है। रोजगार के अधिकार को लेकर संविधान में निहित प्रावधानों की रक्षा के लिए दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक संघर्ष जारी रहने की संभावना है।
अंततः, इस विषय पर आगे चलकर राजनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है, जहाँ रोजगार और आर्थिक विकास की प्राथमिकताओं को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के संवाद का महत्वपूर्ण स्थान रहेगा।















