नई दिल्ली। यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर जनवरी में प्रारंभिक सहमति बन गई थी, लेकिन अंतिम स्वीकृति अभी होनी बाकी है। आयरिश राजदूत केविन केली ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा है कि आयरलैंड इस समझौते पर साल के अंत तक हस्ताक्षर की उम्मीद रखता है।
आयरलैंड की तरफ से इस FTA को लेकर आशावाद का दिखना वैश्विक व्यापार क्षेत्र में इसका महत्व दर्शाता है। यूरोपीय संघ और भारत दोनों ही इस समझौते के जरिए आर्थिक, व्यापारिक, और निवेश सहयोग को और मजबूत बनाना चाहते हैं। वर्ष 2024 में इस समझौते पर अंतिम मुहर लगना दोनो पक्षों के लिए लाभकारी माना जा रहा है।
केविन केली ने बताया कि दोनों पक्ष समझौते के बुनियादी मामलों पर सहमत हैं, लेकिन कुछ तकनीकी और नियमों से जुड़े मुद्दे अभी भी शेष हैं। आने वाले महीनों में ये मुद्दे सुलझाने की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे जल्दी से जल्दी अंतिम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हो सकें।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह FTA व्यापार को नए अवसर देगा, जिससे भारतीय निर्यात में वृद्धि होगी और निवेश आकर्षित होगा। खासकर आयरलैंड जैसे यूरोपीय देशों के लिए यह समझौता महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वे भारतीय बाजार में अपनी पहुंच और बेहतर कर पाएंगे।
इसके अलावा, इस समझौते का महत्व सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों पक्षों की रणनीतिक साझेदारी को भी सशक्त करेगा। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए, इस तरह के सहयोग से दोनों क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अधिक स्थिरता आएगी।
आयरलैंड के राजदूत केविन केली ने यह भी उल्लेख किया कि दोनों पक्ष उच्च स्तरीय वार्ताओं के माध्यम से शेष मसलों पर सहमति बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। आयरलैंड की सरकार यूरोप और भारत के बीच बलशाली आर्थिक संबंधों के लिए इस समझौते को प्राथमिकता देती है।
समाचार एजेंसियों के अनुसार, यूरोपीय संघ और भारत की वार्ता प्रक्रिया अभी जारी है और दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि वार्ता तालमेल से और पारदर्शी रूप से आगे बढ़े। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि समझौते को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
नतीजतन, वर्ष के अंत तक इस मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना प्रबल मानी जा रही है, जो दोनों पक्षों के आर्थिक विकास में एक नया अध्याय खोल सकता है।















