नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ती उम्रदराज़ आबादी के साथ ही घरेलू चिकित्सा जरूरतों में वृद्धि हो रही है। डॉक्टर, वृद्ध देखभाल विशेषज्ञ और रोगी समर्थक अब स्वास्थ्य बीमा नीतियों में बदलाव की मांग कर रहे हैं ताकि ये पॉलिसियां केवल अस्पताल में भर्ती इलाज तक सीमित न रहें, बल्कि घर पर दी जाने वाली देखभाल को भी कवर करें। उनका कहना है कि घरेलू देखभाल अब आधुनिक उपचार और रोगी पुनर्वास का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।
भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 10 करोड़ के पार जा चुकी है और इस तादाद में तेजी से वृद्धि हो रही है। बढ़ती उम्र के साथ कई बुजुर्गों को दीर्घकालिक और जटिल बीमारियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें अस्पतालों की बजाय उनके घर पर उचित देखभाल बेहद आवश्यक हो जाती है। हालांकि, मौजूदा स्वास्थ्य बीमा योजनाएं मुख्य रूप से अस्पताल में भर्ती होने और पारंपरिक उपचार पर केंद्रित हैं, जिससे घरेलू चिकित्सा सेवाओं को पर्याप्त कवरेज नहीं मिल पाता।
डॉक्टरों का मानना है कि अस्पताल के बाहर इलाज की बढ़ती मांग और तकनीकी प्रगति ने घर आधारित देखभाल को अधिक जरूरी बना दिया है। विशेष रूप से बड़ी बीमारी के बाद या पुरानी बीमारियों के प्रबंधन के लिए घर पर पॉलिप्रैक्टिस और फिजियोथेरेपी जैसे उपाय अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन जब तक बीमा पॉलिसी उनमें बदलाव नहीं करेगी, तब तक इस सेवा का आर्थिक बोझ मरीजों और उनके परिवारों पर ही रहेगा।
वृद्ध रोगी देखभाल विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार बुजुर्ग मरीज अस्पताल आने-जाने में असमर्थ होते हैं, जिसके कारण घरेलू सहायता उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार के लिए अनिवार्य होती है। इसलिए विशेषज्ञों ने एसोसिएशनों के माध्यम से सरकार और बीमा कंपनियों से आग्रह किया है कि वे स्वास्थ्य बीमा में घर आधारित देखभाल को समाहित करें। इससे न केवल मरीजों को राहत मिलेगी बल्कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भी दबाव कम होगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस दिशा में कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं और मेन्टेनेंस तथा रिहैबिलिटेशन सेवा को वित्तीय सहायता के दायरे में लाने की बात कही है। हालांकि यह कदम अभी भी प्रारंभिक चरण में है और व्यापक बदलाव के लिए बीमाकर्ताओं के रुख में बदलाव जरूरी है। स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों का सुझाव है कि बीमा कंपनियां अब पारंपरिक हॉस्पिटल अस्यूरेन्स से आगे बढ़कर घरेलू देखभाल पर भी ध्यान दें ताकि यह क्षेत्र सुदृढ़ हो और वृद्ध नागरिकों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो सके।
अंततः, भारत में बढ़ती उम्र की आबादी और बदलती चिकित्सा जरूरतों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि बीमा पॉलिसियों को भी इसके अनुरूप विकसित किया जाए। घर आधारित चिकित्सा देखभाल को कवर करने वाले बीमा अवसर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में ऐसे सुधार देश के वृद्ध मरीजों की जीवन गुणवत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।















