कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी विशेष गहन संशोधन (SIR) के विरोध में नहीं है, लेकिन भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा सच्चे मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश के खिलाफ पूरी तरह खड़ी है।
बीके हरिप्रसाद ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक मतदाता का नाम मतदाता सूची में होना बेहद आवश्यक है और इन मतदाताओं के नामों को हटाने का कोई कारण नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और RSS एक रणनीति के तहत इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं जिससे कि उनके विरोधी, खासकर कांग्रेस के समर्थक, वोटिंग के अधिकार से वंचित हो सकें।
उन्होंने कहा, “हम विशेष गहन संशोधन (SIR) के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह जरूरी है कि इसका संचालन पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ किया जाए ताकि किसी भी सच्चे मतदाता को इस प्रक्रिया से बाहर न किया जाए।” बीके हरिप्रसाद ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने मतदाता पहचान पत्रों और नामों की जांच करें और किसी भी तरह की अनियमितता का तुरंत पता लगाया जाए।
बीके हरिप्रसाद ने आगे कहा कि वे चुनाव आयोग से भी इस मामले में सख्त कदम उठाने की मांग करते हैं ताकि चुनाव प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की राजनीतिक साजिश न पनप सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की आत्मा को बचाने के लिए ऐसी कोशिशों को कभी भी सफल नहीं होने दिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि बीजेपी और RSS के खिलाफ यह आरोप पार्टी की आगामी चुनाव रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें मतदाता सूची में अनियमितताएं कर विपक्षी पार्टियों को कमजोर किया जाए। हालांकि कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की अवहेलना बताया और कहा कि वे ऐसे किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेंगे।
इस मुद्दे पर आगामी दिनों में चुनाव आयोग और सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है जो इस विवाद को लेकर स्थिति स्पष्ट करेगी। फिलहाल, कांग्रेस के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है और चुनावों से पूर्व मतदाता सुरक्षा का प्रश्न काफी अहम हो गया है।















