नई दिल्ली। कला और सक्रियता दो ऐसे क्षेत्र हैं जिनके माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए लंबे समय से प्रयास जारी हैं। लेकिन जब ये दोनों मिलते हैं, तो जन्म लेता है एक नया प्रवाह जिसे आर्टिविज़्म कहा जाता है। आइए समझते हैं कि आखिर यह आर्टिविज़्म क्या है और इसका समाज में क्या महत्व है।
आर्टिविज़्म, कला (Art) और सक्रियता (Activism) का संयोजन है। यह एक ऐसी विधा है जिसमें कलाकार अपनी कला के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक या पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता फैलाते हैं और लोगों को बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं। यह न केवल दृश्य कला तक सीमित रहता है, बल्कि नाटक, संगीत, साहित्य, फिल्म, और डिजिटल मीडिया जैसे विविध क्षेत्रों में भी अपने प्रभाव दिखाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आर्टिविज़्म का प्रमुख उद्देश्य सिर्फ कलात्मक अभिव्यक्ति करना नहीं है, बल्कि उसकी ताकत का उपयोग कर लोगों को किसी मुद्दे पर सोचने, समझने और क्रियाशील बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। उदाहरण के तौर पर, जलवायु परिवर्तन, नस्लवाद, लैंगिक समानता, मानवाधिकार आदि विषयों पर आर्टिविज़्म ने कई बार नए संदेश दिए हैं।
इंटरनेशनल आर्टिविज़्म प्लेटफॉर्म्स पर हमें ऐसे कई कलाकार देखने को मिलते हैं, जो अपनी रचनाओं के ज़रिए सामाजिक न्याय के लिए अभियान चलाते हैं। इन कलाकारों का मानना है कि कला का प्रयोग सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार की जंग में भी किया जा सकता है। इसलिए आर्टिविज़्म को ‘कलात्मक प्रतिरोध’ भी कहा जाता है।
आधुनिक युग में सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ आर्टिविज़्म और भी अधिक सशक्त होता जा रहा है। कलाकार अब अपनी रचनाओं को व्यापक स्तर पर फैलाकर अधिक से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं। जिससे समाज के विभिन्न वर्गों में बदलाव की लहर उठ रही है।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि आर्टिविज़्म वह माध्यम है जो कला की मदद से सामाजिक संवाद को जन्म देता है और सक्रियता को एक नई दिशा प्रदान करता है। भविष्य में यह विधा और भी व्यापक रूप से विकसित होगी और समाज के सकारात्मक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।















