17 सितंबर को प्रख्यात सामाजिक सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी की जयंती देशभर में सम्मानपूर्वक मनाई जाती है। पेरियार का सामाजिक न्याय, समानता और महिलाओं के अधिकारों के लिए योगदान आज भी प्रेरणादायक बना हुआ है। उनके विचार और सिद्धांत तमिलनाडु सहित पूरे भारत में व्यापक प्रभाव रखते हैं।
पेरियार का जन्म 17 सितंबर 1879 को तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन को जातिवाद, कुप्रथा और सामाजिक भेदभाव के विरूद्ध लड़ाई में समर्पित कर दिया। उनका आंदोलन दलितों, पिछड़े वर्गों और महिलाओं के उत्थान पर केंद्रित था। पेरियार ने सामाजिक सुधारों के लिए कई पहलें शुरू कीं और उन्हें राजनीतिक शक्ति में तब्दील किया।
उनके कार्यों और विचारों ने राज्य में सामाजिक बदलाव लाने में मदद की। उन्होंने भारतीय सामाजिक संरचना में व्याप्त असमानताओं को चुनौती दी और सामाजिक सद्भाव के लिए काम किया। पेरियार ने स्वाभिमान आंदोलन, नारी emancipation और जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई।
वर्तमान में भी पेरियार की जयंती अवसर पर विभिन्न राज्य सरकारें और सामाजिक संगठन उनके आदर्शों को याद करते हैं तथा शिक्षा एवं समानता के मुद्दों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं। उनकी विचारधारा पर आधारित कई संस्थान और जीवनदर्शन आज भी समाज सुधार के लिए कार्यरत हैं।
पेरियार के योगदान को मान्यता देते हुए तमिलनाडु सरकार हर साल उनकी जयंती पर सम्मान समारोह आयोजित करती है जिसमें राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र के लोग भाग लेते हैं। इससे युवा पीढ़ी में सामाजिक समरसता, न्याय और बराबरी की भावना को जागृत करने में मदद मिलती है।
इस दिन को याद करके समाज के हर वर्ग को पेरियार के आदर्शों को अपनाने और एक बेहतर समतामूलक भारत के निर्माण की दिशा में प्रयासरत रहने की प्रेरणा मिलती है। उनकी शिक्षाएं आज के सामाजिक परिवेश में भी प्रासंगिक हैं और समाज सुधार के लिए आवश्यक दिशा प्रदान करती हैं।














