देश में तापमान दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है, जिससे फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा तक के आशा कार्यकर्ता बताते हैं कि वे तीव्र गर्मी के बीच बीमार पड़ रहे हैं, वहीं वेतन में देरी, कम भुगतान और सुरक्षा के अभाव से जूझ रहे हैं।
आशा कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य प्रणालियों के अहम स्तंभ हैं। महामारी के दौरान उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हुई, लेकिन फिर भी उन्हें पर्याप्त मान-सम्मान और संसाधन नहीं मिल रहे हैं। कामकाज के दौरान तेज धूप और गर्मी उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। कई बार अत्यधिक गर्मी में काम करते हुए वे पेट की तकलीफ, डिहाइड्रेशन, सिर दर्द जैसी समस्याओं से जूझते हैं।
एक आशा कार्यकर्ता ने कहा, “गर्मी इतनी तेज है कि कई बार काम करना मुश्किल हो जाता है, लेकिन मरीजों की देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें तनख्वाह भी समय पर नहीं मिलती, जिससे मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।” कोविड से लड़ाई में पार्श्व में झुके ये कार्यकर्ता अक्सर खुद बीमार पड़ जाते हैं, फिर भी सेवाएं जारी रखने के कारण उनकी समस्याओं पर ध्यान कम ही दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार देश के कई राज्यों में आशा कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षा उपकरण और पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं होती, जिससे वे रोगों के संपर्क में आने का खतरा उठाते हैं। सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं के वेतन और सुरक्षा पर ध्यान दिया है, लेकिन अभी भी कई स्तरों पर व्यवस्थागत कमियां हैं।
हरियाणा के एक ब्लॉक अधिकारी ने बताया कि गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, पर व्यापक स्तर पर बदलाव आवश्यक है। वेतन भुगतान में तेजी, स्वास्थ्य बीमा और नियमित प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उनकी सुरक्षा और मनोबल बढ़ाने के लिए जरूरी हैं।
इन चुनौतियों के बीच आशा कार्यकर्ता अपनी कर्तव्यनिष्ठा से काम कर रहे हैं, जो भारत के स्वास्थ्य ढांचे के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। देश में बढ़ती गर्मियां और बढ़ते वेतन विवाद के बीच आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर तत्काल ध्यान देना आवश्यक है, ताकि वे स्वस्थ रहकर अपनी सेवा जारी रख सकें।













