कोलकाता, 27 अप्रैल 2024: कोलकाता उच्च न्यायालय ने मेसी इवेंट विवाद में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ तृणमूल नेता अरोप बिस्वास को जबरदस्ती कार्रवाई से राहत प्रदान की है। न्यायालय ने उन्हें पुलिस पूछताछ के लिए उपस्थित होने और अपना पासपोर्ट न्यायालय को जमा कराने के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है।
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि हाल ही में मैस्टीकार्ड द्वारा आयोजित एक फुटबॉल मैच के इवेंट में कुछ अनियमितताओं के चलते पुलिस ने अरोप बिस्वास के खिलाफ जांच शुरू की थी। अरोप बिस्वास को इस प्रकरण में जांच के लिए पुलिस के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया था, साथ ही उनके पासपोर्ट को कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, इस आदेश के खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पूर्व मंत्री पर जबरदस्ती, गैरजरूरी और अत्यधिक दबाव बनाने वाली कार्रवाई की संभावना है, जो कि उनकी निजता और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है। न्यायालय ने उनके पक्ष में तत्काल राहत देते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि वे जांच को अपने निर्धारित नियमों के दायरे में रखकर ही आगे बढ़ाएं।
इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा, “अरोप बिस्वास एक न्यायिक प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और हम न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। ऐसी गलतफहमियां सुलझाने के लिए उचित जांच आवश्यक है, लेकिन किसी भी नेता के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।”
विशेषजनों का मानना है कि इस आदेश से न सिर्फ पूर्व मंत्री को न्यायिक सुरक्षा मिली है, बल्कि यह उदाहरण भी प्रस्तुत करता है कि कानून और न्यायपालिका की प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।
अरोप बिस्वास के वकील ने बताया कि कोर्ट के आदेश से उनके मुवक्किल की प्रतिष्ठा और उनके आवागमन की गोपनीयता सुरक्षित रहेगी। इसके साथ ही अब पुलिस जांच भी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ पूरी होगी।
इस पूरे प्रकरण से स्पष्ट होता है कि राजनीतिक और कानूनी विवादों में भी न्यायपालिका द्वारा व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा जरूरी मानी जाती है। आने वाले दिनों में इस मामले की आगे की जांच और कोर्ट की अगली सुनवाई भी महत्वपूर्ण रहेगी।














