सहारनपुर: मोहतशिम मामले की जांच के दौरान सामने आए जंगी ऐप ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के कुछ प्लेटफॉर्म अपनी गोपनीयता संबंधी विशेषताओं के कारण जांच प्रक्रिया को जटिल बना देते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ऐप ऐसे होते हैं जिनमें उपयोगकर्ता की पहचान सीमित जानकारी के आधार पर बनाई जा सकती है। इसी कारण संदिग्ध तत्व ऐसे माध्यमों का इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण कर रही हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शुरुआती संपर्क के बाद बातचीत को ऐसे ही गोपनीय माध्यमों पर स्थानांतरित किया जाता था। इससे संचार की निगरानी और नेटवर्क की पहचान करना अधिक कठिन हो जाता है। यही वजह है कि एजेंसियां अब डिजिटल फॉरेंसिक जांच पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक जितनी तेजी से विकसित हो रही है, अपराधी और देशविरोधी तत्व भी नए-नए तरीकों का इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने तकनीकी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
अधिकारियों ने आम लोगों, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, ग्रुप आमंत्रण या संदिग्ध संदेशों से सावधान रहें। साइबर जागरूकता और डिजिटल सतर्कता को राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जाने लगा है। एजेंसियों का मानना है कि समाज और सुरक्षा तंत्र के संयुक्त प्रयासों से ही ऐसे नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।














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