नई दिल्ली: केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने पश्चिम बंगाल सरकार से बिजली वितरण कंपनियों (डिसकॉम) के बकाया राशि के समय पर निपटान के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने यह भी जोर दिया है कि प्रीपेड मीटरिंग प्रणाली को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए, जिससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आए और बिजली चोरी पर नियंत्रण पाया जा सके।
मंत्री ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव कम करने के लिए एक मजबूत और प्रभावी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए जो बकाया राशि की नियमित वसूली सुनिश्चित करे। ‘‘प्रतिदिन या कम-से-कम मासिक आधार पर बकाया की वसूली होना जरूरी है ताकि बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति सुधर सके और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़े,’’ उन्होंने कहा।
इसके साथ ही उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग के शीघ्रतम क्रियान्वयन की भी मांग की, जो उपभोक्ताओं को वास्तविक समय में बिजली खपत का आंकलन करने में मदद करेगी। इससे गैर-तकनीकी घाटे में कमी आएगी और उपभोक्ता भी अपनी खपत के प्रति अधिक सचेत होंगे।
पश्चिम बंगाल में अभी भी कई क्षेत्रों में पुराने पारंपरिक मीटरों का उपयोग हो रहा है, जिसके कारण न तो उपभोक्ता के बिल सटीक होते हैं और न ही बिजली कंपनियों को सही राजस्व मिलता है। प्रीपेड मीटर के माध्यम से उपभोक्ता अपने बिजली उपयोग को नियंत्रित कर सकते हैं और भुगतान के लिए पूर्व में राशि जमा कर सकते हैं, जिससे बिजली चोरी में भी कमी होगी।
मनोहर लाल ने इस संबंध में बातचीत करते हुए कहा कि बकाया राशि को समय पर वसूलना न केवल डिसकॉम की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा बल्कि राज्य की ऊर्जा क्षेत्र की समग्र विकास योजनाओं को भी गति देगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार से आग्रह किया कि वे इस दिशा में ठोस योजना बनाएं और उसका जल्द से जल्द क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
विद्युत मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बीते वर्षों में बिजली डिमांड और सप्लाई की लोच में असंतुलन के कारण कई डिसकॉम को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा है। बकाया संग्रहण में सुधार और स्मार्ट मीटरिंग की व्यवस्था इस समस्या का एक महत्वपूर्ण समाधान हो सकती है।
पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के अधिकारीयों ने भी इस दिशा में सक्रियता दिखाते हुए कहा है कि वे जल्द ही प्रीपेड मीटरिंग प्रणाली लागू करने की योजना बना रहे हैं और बकाया राशि के नियमित निपटान के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित कर रहे हैं।
बिजली क्षेत्र में सुधार को लेकर केंद्र और राज्य की बढ़ती सहमति से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में पश्चिम बंगाल में बिजली वितरण बेहतर होगा और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिलेगी।














