Raipur CG

छत्तीसगढ़ के वेदांता पावर प्लांट हादसे के बाद राज्यपाल ने सीआईएफ आईएएस हिमशिखर गुप्ता

छत्तीसगढ़ के वेदांता पावर प्लांट हादसे के बाद राज्यपाल ने सीआईएफ आईएएस हिमशिखर गुप्ता

रिपोर्टर मज़हर इक़बाल
रायपुर April 29, 2026

रायपुर: वेदांता पावर प्लांट हादसे में 25 मजदूरों की मौत को राज्यपाल रमेन डेका ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज और लेबर कमिश्नर सह लेबर सिकेट्री आईएएस हिमशिखर गुप्ता को लोकभवन बुलाकर बात की।

राज्यपाल डेका ने कारखानों में होने वाली औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने और श्रमिकों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने निर्देश दिए कि कारखानों में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो, मशीनों की नियमित जांच की जाए तथा कर्मचारियों को समय-समय पर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग की जाए, ताकि संभावित दुर्घटनाओं को समय रहते रोका जा सके और श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार हो।

3 साल में 300 श्रमिकों की मौतें

छत्तीसगढ़ के कल-कारखानों में सुरक्षा के इंतजामों की क्या स्थिति है, तीन साल में करीब सवा तीन सौ श्रमिकों की मौतें हो गई। मगर कारखानों की सुरक्षा की देख-रेख करने वाले विभाग औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के किसी मुलाजिम को नोटिस तक जारी नहीं हुई। जाहिर है, वेदांता पावर प्लांट का अफसरों ने रेगुलर जांच की होती तो हादसे में 25 मजदूरों की जान नहीं जाती। मगर औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा सिर्फ कारखानों से महीना वसूली का विभाग बन कर रह गया है।

रायपुर। विधानसभा के बजट सत्र में श्रम विभाग ने जानकारी दी थी कि पिछले तीन साल में 296 मजदूरों की कारखानों में मौतें हुई हैं। इसके बाद सक्ती स्थित वेदांता पावर प्लांट के बॉयलर हादसे में 25 मजूदरों की झुलसकर जानकर चली गई। इसको मिला दें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में तीन साल में फैक्ट्री दुर्घटनाओं में 321 मजूदरों की असामयिक मौत हो गई।

वेदांता के मालिक समेत 10 पर एफआईआर

सक्ती में हुए पावर प्लांट हादसे में वेदांता कंपनी के मालिक उद्योगपति अनिल अग्रवाल समेत 10 लोगों के खिलाफ पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। मगर यह कार्रवाई सिर्फ रस्मी मानी जा रही, क्योंकि वेदांता एक कंपनी है, कंपनी एक्ट के तहत बोर्ड ऑफ डायरेक्टर है। लिहाजा, किसी व्यक्ति विशेष पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। वकीलों का कहना है, कोर्ट में यह एफआईआर टिक नहीं पाएगा। दो-एक पेशी में ही मामला खतम हो जाएगा।

अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं

तीन साल में 321 श्रमिकों की मौत हो गई मगर इस दौरान कारखानों की सुरक्षा के जिम्मेदार औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के किसी अफसर के खिलाफ तो दूर की बात एक कर्मचारी को नोटिस भी नहीं दी गई है। बता दें, कारखाना अधिनियम 1948 के तहत राज्यों मेेें औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा संचालनालय होता है। उसके तहत विभिन्न जिलों में इसके ़क्षेत्रीय कार्यायल होते हैं। छत्तीसगढ़ में पहले रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में इसके ऑफिस होते थे। मगर औद्योगिकीकरण बढ़ने के बाद रायगढ़, जांजगीर समेत और कई जिलों में भी औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के ऑफिस खुल गए हैं। इसमें असिस्टेंट डायरेक्टर से लेकर डिप्टी डायरेक्टर, एडिशनल डायरेक्टर स्तर के अफसर होते हैं।

आईएएस होते हैं सीआईएफ

हर राज्य में एक चीफ इंस्पेक्टर और फैक्ट्री होता है। यानी सीआईएफ। छत्तीसगढ़ में लेबर सिकरेट्री या लेबर कमिश्नर को यह दायित्व सौंपा जाता है। उसके निर्देशन में औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के अफसर काम करते हैं। औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा का काम होता है, समय-समय पर कारखानों की जांच कर अगर उसमें कुछ खामियां है तो उसकी रिपोर्ट देना। इस विभाग के पास इतने अधिकार हैं कि मजदूरों की जानमाल का हवाला देकर वह किसी भी कारखाना को बंद करा सकता है। मगर विभाग सिर्फ वसूली का विभाग बनकर रह गया है। कल-कारखानों से हर महीने पैसे वसूल कर इस विभाग के अधिकारियों के पास पहुंचा दिया जाता है, उसके बाद औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के अफसर अपनी जिम्मेदारियों से आंख मूूंद लेते हैं।

बालको के चिमनी हादसे में 40 मौतें

सितंबर 2009 में कोरबा स्थित बालको के चिमनी हादसे में 40 मजदूरों की मौत हुई थी। उस समय भी चीनी कंपनी पर मुकदमा दर्ज कर मामले को रफा-दफा कर दिया गया था। उस समय औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के एक डिप्टी डायरेक्टर को सरकार ने सस्पेंड किया था।

0 248 से अधिक मजदूर जख्मी

छरत्तीसगढ़ में अगर पिछले कुछ वर्षों में हुए कारखाना दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति चिंताजनक दिखाई देती है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में औद्योगिक दुर्घटनाओं में 296 मजदूरों की मौत हुई है, जबकि 248 से अधिक श्रमिक घायल हुए हैं।

छत्तीसगढ़ में 7324 कारखाने

छत्तीसगढ़ में कुल 7,324 कारखाने संचालित हैं। इनमें से 948 को ‘खतरनाक’ और 32 को ‘अत्यंत खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में इन इकाइयों में सुरक्षा मानकों का पालन और भी अधिक जरूरी हो जाता है। सरकार द्वारा पीपीई किट, सुरक्षा उपकरण और अन्य आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य की गई हैं, लेकिन लगातार हादसों को देख नहीं लगता कि औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग इस पर अमल करा रहा है।

कारखानों के बड़े हादसे

छत्तीसगढ़ में फैक्ट्री दुर्घटना के कई मामले सामने आए हैं। इसी साल बलौदाबाजार स्थित एक इस्पात प्लांट में डस्ट सेटलिंग चेंबर में हुए विस्फोट में 7 मजदूरों की मौत हुई थी। वहीं, 2025 में रायपुर के सिलतरा स्थित गोदावरी स्टील प्लांट में छत गिरने से 6 श्रमिकों की जान चली गई। 2024 में सरगुजा के एलुमिनियम प्लांट में कोयले से भरा कन्वेयर बेल्ट गिरने से 4 लोगों की मौत हुई थी। बेमेतरा के एक कारखाने में मई 2024 में दो श्रमिकों की मौत हो गई थी।

इसके अलावा फरवरी 2026 में रायगढ़ के मंगल कार्बन फैक्ट्री में विस्फोट के बाद दो मजदूरों और एक बच्ची की मौत हो गई। मार्च 2026 में बलौदाबाजार के स्वदेश मेटालिक प्लांट में एक श्रमिक 30 फीट ऊंचाई से गिरकर जान गंवा बैठा। जून 2025 में भिलाई स्टील प्लांट में 1000 किलो का जंबो बैग गिरने से एक महिला श्रमिक की मौत हो गई थी। हाल ही में भिलाई स्टील प्लांट में टर्बाइन में आग लगने से सात कर्मचारी घायल हो गए, जहां कई श्रमिकों को जान बचाने के लिए ऊंचाई से कूदना पड़ा।

Follow us on facebook

Live Videos

Breaking News

Advertisements

Advertisements

Advertisements

Advertisements

Our Visitor

0789356