M.P.

बालाघाट में देश की पहली जनमन सड़क पर पुल बनाना भूले जिम्मेदार, जोखिम भरा है इस रोड का सफर

बालाघाट में देश की पहली जनमन सड़क पर पुल बनाना भूले जिम्मेदार, जोखिम भरा है इस रोड का सफर

बालाघाट में अधिकारियों ने नहीं बनाया सड़क पर पुल, बैगा आदिवासियों में नाराजगी, शिकायत के बाद भी नहीं सुन रहे जिम्मेदार.

बालाघाट:प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत देश की पहली सड़क बालाघाट के आदिवासी बाहुल्य परसवाड़ा क्षेत्र में 16 मार्च 2024 को बनकर तैयार हुई. चूंकि इस योजना के तहत बनने वाली यह देश की पहली सड़क थी. लिहाजा चंद दिनों तक यह सड़क सुर्खियों में भी छाई रही. वहीं ग्रामीणों ने सोचा आखिरकार उन्हें पक्की सड़क नसीब हुई, जिससे अब उन्हें अस्पताल, स्कूल, बाजार या कहीं भी आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह खुशी महज चंद दिनों की है, क्योंकि सड़क पर बनने वाला पुल आज भी अधिकारियों की बाट जोह रहा है.

2024 में तैयार हुई थी प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत सड़क

देश की पहली जनमन सड़क का तमगा लेकर आज भी यह सड़क इस रास्ते में पड़ने वाले पुलों के निर्माण की बाट जोह रही है. सड़क 16 मार्च 2024 को बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन उसके बाद से अब तक रास्ते पर पड़ने वाले नालों पर पुल बनाने को लेकर कोई काम नहीं किया गया है. जिस कारण यहां से होकर गुजरने वाले बैगा आदिवासियों को आज भी पुल के अभाव में आवागमन में परेशानियां झेलनी पड़ रही है.

सड़कों पर नहीं बना पुल, बैगा समुदाय में नाराजगी

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में चार महिनों के लिए ग्राम पंडाटोला और डण्डईझोला के लोगों के लिए आवागमन बाधित हो जाता है. इसको लेकर कई बार उन्होंने शासन-प्रशासन के पास गुहार लगाई, लेकिन अभी तक कोई कारगर कदम नहीं उठाये गए हैं. जिसको लेकर आदिवासी बैगा समुदाय के लोगों में नाराजगी भी देखने मिली. ज्ञात हो कि आदिवासी बाहुल्य परसवाड़ा तहसील स्थित ग्राम पंचायत नाटा के ग्राम नीमटोला और पंडाटोला के बीच स्थित नाले पर पुल बनाया जाना है, जिसका काम अधूरा पड़ा है.

मंडला के ग्रामीणों का दर्द, नाले के पानी से बुझा रहे प्यास, ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते बच्चेबुरहानपुर में आसान नहीं शिक्षा की डगर, उफनता नाला पार कर स्कूल पहुंच रहे बच्चे बारिश में जोखिम भरा सफर तय करते हैं आदिवासी बारिश के दौरान यहां पर लोगों को जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता है. ग्रामीणों की मानें तो बारिश के दौरान ग्राम डण्डईझोला पूरी तरह टापू बन जाता है. यहां से न तो बच्चे स्कूल जा पाते हैं, और न ही मरीज, गर्भवती महिलाएं व बुजुर्गों अस्पताल पहुंच पाते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण को लेकर कई बार पंचायत स्तर से प्रस्ताव भेजे गए हैं, साथ ही जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपा गया. इसके अलावा अधिकारियों से भी कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक पुल निर्माण को लेकर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई.

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