Chhattisgarh COVID-19

रोजी-मजदूरी करने वाले हाथों ने कभी सोचा नहीं था सरकार की योजना से उनके जीवन में इतना बड़ा बदलाव आएगा

अनिता बाई को बाड़ी में काम करके मिलता है आनंद

अनिता कहती हैं घर का खर्च भी निकल जाता है और प्रॉफिट भी होता है

लॉक डाउन में बाड़ी बनी आजीविका का माध्यम

सब्जी उत्पादन कर महिलाओं ने अब तक 1.14 लाख रुपए कमाए

महिलाओं की मेहनत के बारे में सुना तो मुख्यमंत्री भी आए बोरेन्दा की इस बाड़ी में

दुर्ग 9 दिसंबर 2020/ पाटन ब्लॉक के बोरेन्दा गांव की अनिता बाई के चेहरे पर आज सुकून भरी मुस्कान है और हो भी क्यों न, अपने हाथों से लगाई सब्जियाँ उनको अच्छी आमदनी तो दे ही रही हैं बल्कि उनको यहाँ मानसिक आनंद भी मिलता है। कहते हैं वर्क सेटिस्फेक्शन बहुत जरूरी होता है और साथ में अगर घर के सारे खर्च भी निकल जाए तो सोने पे सुहागा।
बोरेन्दा की सामुदायिक बाड़ी में काम करने वाली बहुत सी महिलाएं पहले मजदूरी करती थीं और कुछ घर पर ही रहती थी। मजदूरी करने वाले इन हाथों ने कभी नहीं सोचा था कि सरकार की एक योजना उनके जीवन में इतना बड़ा बदलाव ले आएगी। सामुदायिक बाड़ी योजना के तहत 1.96 हेक्टेयर जमीन में बाड़ी विकसित की गई जहां गाँव की महिलाओं को काम दिया गया। महिलाओं ने दिन रात मेहनत कर खाली जमीन को हरी भरी बाड़ी में बदल दिया। इनकी मेहनत रंग लाई और दूर-दूर तक बोरेन्दा की इस सामुदायिक बाड़ी का यश फैलने लगा। बड़ी बात तो तब हो गई जब मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल खुद इनसे मिलने आए। मुख्यमंत्री ने भी इन महिलाओं के काम की सराहना की और इनसे सब्जियां खरीदी। लॉकडाउन के समय यह बाड़ी इन महिलाओं के लिए आजीविका का साधन बनी। एक तरफ तो कोविड-19 संकट में लोगों के लिए आजीविका का संकट मंडरा रहा था लेकिन छत्तीसगढ़ की जन हितैषी योजनाओं , शासन प्रशासन की कर्मठता ने आपदा को अवसर में बदलने की राह आसान की। खासकर ग्रामीण अंचलों में सरकार की योजनाओं ने लोगों को किसी भी दिक्कत का सामना नहीं करने दिया। श्रमिक परिवारों में जहां रोज कमाने और रोज खाने की स्थिति होती है के लिए कोविड बड़ी आपदा थी। मगर सरकार की सूझबूझ और दक्ष प्रशासनिक व्यवस्था और समुदाय के सहयोग के कारण इस संकट से निकलने में थोड़ी आसानी हुई। हर हाथ को काम मिला और कोई भी भूखे पेट नहीं सोया। दूसरे राज्यों में कमाने खाने गए छत्तीसगढ़ के लोग जब अपने घर वापस आए तो उनके लिए भी पर्याप्त रोजगार सृजन कर सहायता की गई।
कोविड संकट के दौरान ही बोरेन्दा की कर्मठ महिलाओं ने सामुदायिक बाड़ी का विकास किया। इन महिलाओं को बाड़ी में काम करने के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजना के सहयोग से मजदूरी का भुगतान भी किया गया। पंचायत के सहयोग से सिंचाई के लिए व्यवस्था की गई। इसके बाद धीरे-धीरे इन महिलाओं की मेहनत दिखाई देने लगी जब इस बाड़ी में हरी-भरी सब्जियां लहलहाने लगी। पिछले 10 महीनों में यहां सब्जियां उगा कर यहाँ की महिलाएं आर्थिक रूप से समर्थ बनी हैं। खुशी की बात यह है कि महिलाएं खुद सब्जियों उगाती हैं और खुद ही उसे बाजार में विक्रय करती हैं। अनिता पटेल बताती हैं जब उन्होंने कोरोना वायरस के बारे में सुना तो लगा ना जाने अब क्या होगा लेकिन सरकार ने हमको जमीन दी, काम दिया बस मेहनत हमको करनी थी। पहले केवल हमारे हाथ मजदूरी के पैसे आते थे लेकिन अब हम जो सब्जियां उगा रहे हैं उससे हमको ज्यादा आमदनी हो जाती है घर के लिए भी सब्जियां यहीं से मिल जाती हैं जो रुपए हमें मिलते हैं उससे परिवार की जरूरतें भी अच्छी तरह से पूरी हो जाती है।
*नीरू बाई निषाद ने बाड़ी लगाई कुछ आमदनी हुई तो खरीदा स्मार्ट फोन ,बच्चों की पढ़ाई में मिली मदद-* नीरू बाई बताती हैं की सब्जियां उगा कर उन्हें परिवार का खर्चा चलाने में मदद मिल रही है, इसके अलावा उन्होंने बाड़ी से हुई आमदनी की मदद से स्मार्टफोन भी खरीदा है जो उनके बच्चों को पढ़ाई के लिए बहुत जरूरी था। नीरू बाई ने बताया कि उन्हें जो आमदनी हुई थी उसमें से 3 हजार रुपए और अपनी पुरानी बचत 5 हजार रुपए को मिलाकर उन्होने 8 हजार रुपए का मोबाईल खरीदा । सामुदायिक बाड़ी योजना से उनको काफी मदद मिली है।
*शिवबती पहले मजदूरी करती थी 5 महीने पहले सामुदायिक बाड़ी से जुड़ी अब सब्जियाँ उगाकर, कर रहीं हैं अच्छी आमदनी-* शिवबती बताती हैं कि वह पहले मजदूरी का काम करती थी ठीक ठाक पैसे मिलते थे लेकिन अब सब्जियां उगा कर ज्यादा आमदनी हो जाती है। उनको यहां काम करना बहुत अच्छा लगता है। इससे इनके परिवार का खर्चा भी निकल जाता है और थोड़ी बचत भी हो जाती है। शिवबती कहती है कि अब तो काफी लोग बाड़ी आकर भी सब्जियां खरीद लेते है। आते जाते हर राहगीर एक बार उनकी बाड़ी में जरूर रुकता है।
*महिलाओ की मेहनत से बोरेन्दा का नाम दुर्ग में ही नहीं प्रदेश में भी प्रसिद्ध हुआ-* बोरेन्दा के सरपंच श्री टुमेश्वर साहू बताते हैं कि महिलाएं यहां बहुत मेहनत से काम कर रही हैं। इनकी मेहनत के कारण ही दुर्ग जिले में ही नहीं पूरे राज्य में बोरेंदा गांव का नाम प्रसिद्ध हो गया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जब यहां आए तो महिलाओं के उत्साह का कोई ठिकाना नहीं था मुख्यमंत्री जी ने महिलाओं के साथ बातचीत की और उनका उत्साहवर्धन भी किया। श्री साहू बताते हैं कि मुख्यमंत्री जी का इस तरह आना बहुत गर्व की बात है।
*दस समूह कर रहे है सब्जी का उत्पादन -* रोजगार सहायक श्री राधेश्याम साहू ने बताया कि वर्तमान में 10 समूह यहां काम कर रहे हैं। पहले चरण में सब्जी उत्पादन से 65 हजार रूपए में दूसरे चरण मे अब तक 49 हजार रुपए की आमदनी अर्जित की है। रोजगार सहायक ने बताया कि बोरेन्दा की सामुदायिक बाड़ी में सीता स्व सहायता समूह, जय मां शीतला स्व सहायता समूह, श्रद्धा स्व सहायता समूह, जानकी स्व सहायता समूह ,जय ज्वाला मां स्व सहायता समूह, जय मां संतोषी स्व सहायता समूह, मेरे राम स्व सहायता समूह, तुलसी स्व सहायता समूह, शिवबती पटेल और नीराबाई निषाद सब्जी उत्पादन कर रही हैं।

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